हार गए

हार गए हम हार गए ,जीवन की बाज़ी हार गए,
तन थका हुआ मन थका हुआ जीवन की डगर थकी सी है,
वो थके दिखाई देते हैं पल अभी-अभी जो चार गए,
निज व्यथा कही ना जाती है,सुनकर दुनियाँ इठलाती है,
किस डगर चला जाता है मन,क्या कहें कि हम किस पार गए
ये हर पल घुटती सी साँसें,ये हर क्षण बढ़ती सी प्यासें,
आँखों से पीर बरसती है पर आँसू भी बेकार गए उर्मिला माधव
22.7.2018

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