रह गए

उनको देखा......देखते ही रह गए,
ओर उनसे बात दिल की कह गए,

इस क़दर शफ्फाक़ थे ओर खूबरू,
झिलमिलाती चांदनी थी, बह गए,

ये नहीं मालूम,दिल का क्या हुआ,
साथ अपने बेख़ुदी थी, सह गए,

उनका रंग-ओ-नूर था यूँ पुर असर,
एक सहेली ने सदा दी,.....वह गए,

आख़िरश तो होश भी आना ही था,
बंदिशें थीं, बेबसी थी, .....ढह गए.....
#उर्मिलामाधव...
23.7.2015....

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