रह गए हैं

हम मुहब्बत के ग़म सह गए हैं,
अश्क आंखों में कम रह गए हैं,

ये भी आख़िर बताते,कहाँ तक,
आधे-आधे से हम रह गए हैं,
उर्मिला माधव
20.7.2018

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