ख़राब कर डाला

वक़्त कितना ख़राब कर डाला,
ख़ुद को ख़ुद ही हबाब कर डाला,

तंज़ करना भी एक नशा ही है,
सबको नाहक़ जवाब कर डाला,

आग कितनी जिगर में रखते थे,
जाने क्या-क्या हिसाब कर डाला,

ज़िन्दगी उनकी तल्ख़ है शायद,
हर मरासिम सराब कर डाला,

गलतियां हमसे ये हुईं साहब,
ज़ीस्त को जब सबाब कर डाला,

जो न हरगिज़ ये ताब रखते थे,
उनको भी जी जनाब कर डाला..
उर्मिला माधव...
31.7.2015

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