इज़्ज़त क्यों उछाली जाए
जान सांसत में न डाली जाए,
हर जतन करके बचा ली जाये,
जब अंधेरों से खौफ़ लगता हो,
इक नई शम्मा जला ली जाये,
तू मेरा दोस्त है कोई गैर नहीं,
तेरी इज्ज़त क्या उछाली जाए,
मील के पथ्थरों से उलझन है ?
राह कोई और बना ली जाए,
गोकि तकमील इश्क़ करना है,
फिर नई दुनियां बसा ली जाए ....
उर्मिला माधव...
17.7.2015
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