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Showing posts from April, 2018

नज़्म, बिक रही हैं

रहे इश्क़ की अज़मतें बिक रही हैं, अरे बे-ख़बर हसरतें बिक रही हैं, मुहब्बत के अब क़द्रदाँ ही कहाँ हैं फ़रेबों के दम अस्मतें बिक रही हैं, दरीचों में बैठी वफ़ा रो रही है, बड़ी शान ...

संभलता दिल नहीं अपना

☺️☺️☺️ संभलता दिल नहीं अपना,वो गैरों से उलझते हैं, न जाने क्यूँ उछलते हैं,न जाने क्यूँ किलकते हैं, तवज्जो ही नहीं देता कोई उनकी अदाओं पर, बहुत बेबाक़ लहजे में,न जाने क्या वो बक...

रंग देखो

दोस्ती में दुश्मनी का रंग देखो, रौशनी की आँधियों से जंग देखो, दोस्तों तुम बेवफा भरपूर रहकर, मेरी दुनियाँ का निराला ढंग देखो, छूटती साँसें हुयीं हैं आज काफ़िर, उम्र का भी दायरा...

सत्य कैसे देख लोगे

आत्मा ही दिग्भ्रमित है,सत्य कैसे देख लोगे, स्वार्थ अंतर में निहित है,सत्य कैसे देख लोगे, दृष्टि दूषित होगई,तब व्यर्थ ही दृष्टांत हैं सब, दोष भी इच्छा जनित है,सत्य कैसे देख लो...

परस्तार हुए

ऐसी नज़रों के परस्तार हुए, जिस्मों जाँ दोनों तार-तार हुए, आज दिल ये सवाल करता है, बे सबब इतने क्यूँ निसार हुए, फूल बन कर क़रीब आए थे, दूर तो थे ही उसपै ख़ार हुए, लोग कहते हैं तजुर्...

रूठ जाते हैं

ऐसा करते हैं,रूठ जाते हैं, ज़िन्दगी भर को छूट जाते हैं... कब तलक आपको पुकारें हम, इतना थकते हैं टूट जाते हैं.. दिल को थामे हैं दोनों हाथों से, आबले फिर भी फूट जाते हैं.. दिल पे पहले ही स...

संभाला हमने

उम्र भर साख़ ओ ईमान संभाला हमने, ख़ुद को कोने में कहीं, जान के  डाला हमने, जिसको देखो वो गुनहगार कहे जाता था, दिल के दुखने को बड़ी देर तक टाला हमने, उर्मिला माधव, 29.4.2018

दिखलाते रहे

इस क़दर संजीदगी से पेश वो आते रहे, होगए गाफ़िल फ़रेब-ए ज़ीस्त हम खाते रहे, उनकी फ़ितरत में तग़ाफ़ुल का चलन कुछ ख़ास था, ख़ामियों को ख़ूबियों के साथ दिखलाते रहे, अपने दिल को हम...

चिलमन गिराई हमने

मैं अश्कबर हूँ ना कोई देखे, यूँ रुख़ पे चिलमन गिराई हमने, न कोई आहों का दर्द जाने, यूँ बात हँसके छुपाई हमने। हमें मुहब्बत थी आँधियों से, तो कैसे तूफ़ाँ से बच निकलते, कि अपने जज़्...

सड़क पर रहने वाले युवक की मनोव्यथा-

अनुष्ठान जब कोई होता, मेरा मन भीतर से रोता , मेरे पास कमीज़ नहीं थी, कोई मुझे तमीज नहीं थी, कहीं अगर जो बाजे बजते , मेरे ख्वाब चौगुने सजते, मन पंछी तब खूब उछलता, जाने को ये खूब मचलता, ...

पता तो करो

किसने भेजा है ये पयाम कुछ पता तो करो, क्या है इलज़ाम मेरे नाम कुछ पता तो करो, शह्र में किस तरह का शोर आज बरपा है' सबका है सब्र क्यूं तमाम कुछ पता तो करो... चार सम्तों में इक नफ़स को जगह ...

बीनाई तो पाई नहीं

आँख है पर क्या करें बीनाई तो पायी नहीं, बात बढ़के हसरत-ए-दीदार तक आई नहीं, आँख से परदे हटाके,दिल की जानिब देखले, इस तरह गर्दन झुकानी क्यूँ तुझे आई नहीं?? तार दामन के बचाता है अबस ही ...

नज़्म

ज़िन्दगी इस तरह सम्हाली है, पिछली यादों पै ख़ाक डाली है, अपनी आहों पै इख़्तियार रखा, कुछ न कहने की क़सम खाली है, जिससे दिलने गिला किया ही नहीं, उससे फिर रूह क्यूँ सवाली है?? अपने ...

आता रहेगा

अगर इस क़दर दिल दुखाता रहेगा, यक़ीनन ही बस आता-जाता रहेगा, तवज्जो को जाने न जाने तगाफ़ुल, फ़क़त दीदा-ए- तर दिखाता रहेगा भटकती फ़ज़ाओं की तनहाइयों में जबीं कोई कब तक झुकाता रहेगा, अजब ख...

Gazal

एक आवाज़.... मैले कुचैले कपडे आँखों की इस नमी पर, ख़ाके उतारते हैं काग़ज़ की एक ज़मीं पर, तकलीफ को हमारी,मौज़ू बना बना कर, उंगली चुभा रहे हैं,हालात की कमी पर, कैसे बताएं इनको,इनकी तरह हैं ...

आसानी है

तेग तुम ही ने तानी है हमको अब आसानी है, तुमने ये सोचा ही कब, बिगड़ी बात बनानी है, हमने बहुत तसल्ली से, नब्ज़ तुम्हारी जानी है, इसमें कुछ भी नया नही, फ़िर-फ़िर वही कहानी है, दुनियां में ...

मानी कहाँ

इल्तिज़ा उसने मेरी मानी कहाँ, पर मिरे भी सब्र का सानी कहाँ, कांपती आवाज़ में रोका किये, उसने वो आवाज़ पहचानी कहाँ, सूखती है ये सरापा भीग कर, इश्क़ की बुनियाद में पानी कहाँ, मैंने उस...

ढोते रहे

इक वफ़ा के नाम पर मजबूरियां ढोते रहे, ज़िन्दग़ी के वास्ते वीरनियां बोते रहे, यूँ बज़ाहिर महफ़िलों की शिरक़तें जारी रहीं अपने हिस्से की मगर तन्हाइयां रोते रहे उर्मिला माधव

नज़रे बद से

सभी ने तमाशा,किया बढ़ के हद से, सबब कुछ नहीं था यूँ ही बस हसद से, तआक़ुब किया इस क़दर जिंदगी का, बचाते फिरे ख़ुद को हम नज़रे बद से, sabhi ne tamaashe kiye badhke had se, sabab kuchh nahin tha,yun hi bas hasad se, t'aaqub kiya is qadar zindagii ka, bachaate phire,khud ko ham nazare-bad se... उर्मिला माधव... 23.4.2016 तआक़ुब---- पी...

हक़ अदा नहीं होता

aadhi fil badiih.... :) pyar ka haq adaa nahin hota, mujhse gar wo milaa nahin hota, yun hii aankhen,barasti rah jaatin, us se gar silsilaa nahin hotaa, shaam dhalte hi yaad aatii hai, wo bhi mujhse judaa nahin hota, usne paigaam se navazaa hai, gair ko ye pataa nahin hotaa, uski aankhon men koii jaaduu hai, warna ye dil jhuka nahin hotaa, Urmila Madhav 23.4.2016

ज़रा-ज़रा

तू जो दोस्त ही है अगर मेरा, तो समझ तो मुझको ज़रा ज़रा, वो जो ज़ख़्म मेरा भरा नहीं, किया फिर से तूने हरा हरा, मेरा ग़म से सीना फ़िग़ार है रहे दिल भी सबसे डरा डरा, इसे तू ही कह क्या ये ठीक है? ह...

तग़ाफ़ुल

पहले होता था ग़म तग़ाफ़ुल का, अब ..किसी बात का नहीं होता.... वो जो सूरज बहुत चमकता है, वो कभी रात का नहीं होता, ------------------------------------------------ Pahle hota tha,gam tagaful ka, Ab, kisii baat kaa nahin hotaa... Wo jo suraj bahut chamakta hai, Wo kabhi raat ka nahin hotaa.. उर्मिला माधव, 21.4.2016

जवानी खा रहे हैं

सियासत के नाम--- ------------------------- कितनी छोटी उम्र में बहका रहे हैं, लोग बच्चों की जवानी खा रहे हैं, कौन कितनी दूर तक माहिर हुआ है, दूसरा पहलू फ़क़त दिखला रहे हैं.. कुर्सियों पै बैठकर ऊंचाइयों स...

याद उनकी सताती रही

याद उनकी सताती रही रात भर, नींद आँखें चुराती रही रात भर, रूह बेचैन होकर भटकती रही, बेबसी दिल दुखाती रही रात भर, एक खुशबू का झोंका मुसलसल रहा, रात रानी रुलाती रही रात भर, #उर्मिला...

रात भर

तरही ग़ज़ल ------------- एक चिलमन सरकती रही रात भर, आँख रह-रह के तकती रही रात भर, रात रानी की खुशबू में डूबा जिगर, सांस जिससे महकती रही रात भर, एक अन्देशा सताता रहा बस मुझे, ये पलक जो फड़कती रही ...

संग दिल

आज कल वो होगए हैं संग दिल, आदतन यूँ भी हैं वो कुछ तंग दिल, हम रक़ाबी में सजा कर ले गए , कितना सुंदर ख़ुशनुमाँ नौरंग दिल, इससे बढ़ कर बेरुख़ी होती भी क्या बा-अदब लौटा दिया बैरंग दिल...

मानचित्र का

अच्छे शब्दों का संयोजन, परिचय देता है चरित्र का, ओछे शब्दों के प्रयोग से, होता है अपमान मित्र का, वाणी है संस्कृति सभ्यता, दर्पण देश के मान चित्र का, उर्मिला माधव... 19.4.2016

छुइ मुई है

ख़ुश्क आंखों में नमी पैदा हुई है, एक चाहत आज तक भी, छुइ मुई है, इक मेरा ऐजाज़ था जो तू न समझा, अब तलक भी देख पर्दा- ए -दुई है उर्मिला माधव.. 19.4.2014

सौगंध है भगवान की

एक मित्र की चाहत पर... आप ही मनमीत हैं,सौगंध है भगवान् की, आप सुर संगीत हैं ,सौगंध है भगवान् की, आये हैं संघर्ष कितने मेरे जीवन मैं सतत, आप उसकी जीत हैं सौगंध है भगवान् की, जो भी हूँ ...

क्या समझूँ ---फ्री वर्स

क्या समझूँ तुम्हें, एक डगमगाया हुआ वजूद? या एक क़ैदी ? बे-बुनियाद दायरों में महदूद, या बंधे हुए आसमान में उड़ने वाला पंछी, या बिना नाथ का बैल ? जिसकी नकेल, हरकारे के हाथों में, सिर्...

साथ नहीं है

लगती रही है साथ सी पर साथ नहीं है, इस ज़िंदगी की कोई भी औक़ात नहीं है, ये मौत का वक़ार है लो देख लो मियाँ, ख़ाली हैं दोनों हाथ, कोई बात नहीं है, दूल्हा हो या दुल्हन हो नहीं फ़र्क़ है कोई, अन...

आपकी कसम

दुनियाँ से कुछ मिला भी नहीं...आपकी क़सम, और हमको कुछ गिला भी नहीं,आपकी क़सम, हम उम्र भर निभाया किये...मुश्किलों के साथ, और इसका कुछ सिला भी नहीं,आपकी क़सम, किस दरज़ा हम जगाते रहे.....कम नसी...

नमी पर

एक आवाज़.... मैले कुचैले कपडे आँखों की इस नमी पर, ख़ाके उतारते हैं काग़ज़ की एक ज़मीं पर, तकलीफ को हमारी,मौज़ू बना बना कर, उंगली चुभा रहे हैं,हालात की कमी पर, कैसे बताएं इनको,इनकी तरह हैं ...

अलहदा दोस्तो

अपनी दुनियां है बिलकुल जुदा दोस्तो इसलिए अब चलो .....अलविदा दोस्तो.... लोग जितने भी दुनियां में मिलते हैं सब, आदमी हैं ,......नहीं कोई ख़ुदा दोस्तो... ज़िन्दगी भी ..कोई मिलकियत तो नहीं, रंग इ...

तुम भी बहोगे

आओ क्या मेरी तरहा तुम भी रहोगे? मेरा वीराना कभी तुम भी सहोगे? अब मिरी तनहाइयों का ये है आलम, किस तरह जीती हूं ये तुम भी कहोगे, मेरी आंखों में समंदर है पता है ? बह अगर निकला तो फिर त...

समझते थे

उसको सबसे जुदा समझते थे, सच ये है..नाख़ुदा समझते थे, उसको दर्ज़ा दिया मशाइख का, खुद को अदना ग़दा समझते थे, जिसमें था इन्तेहा का रंग रचा, उसको हम इब्तेदा समझते थे, दिल को ये रायगाँ यक़...

सांप डसते भी रहे

बात हम समझें वो रस्ते भी रहे, ये समझ हम खूब हँसते भी रहे, सब के सब मुस्कान ले आते रहे, दांव पा कर तंज कसते भी रहे यूँ ब-ज़ाहिर दोस्त भी कहते रहे, आस्तीं के सांप, डसते भी रहे, हर हिमाक़त ...

डर्टी वार्स

एक जंग के नाम---- (Dirty Wars) ------------------------------------------- ज़िन्दगी भी क्या दिखाती है किसीसे क्या कहें, रूह तक जब काँप जाती है किसीसे क्या कहें जिस्म से पहचान रखना एक दीगर बात है, सांस भी क़िस्तों में आती है किसी...

रुस्तमों का

याद क्या करना ग़मों का, आते-जाते ...मौसमों का, ख़ैर मक़दम ही किया है, ज़ह्र से उन आलमों का, क्यूं रहे शिकवा किसीसे, उम्र भर के मातमों का, डर कहां बाक़ी रहा अब, गोलियों का और बमों का सामना ...

तो मैं जानूँ

डूबते सूरज की समझे नातवानी तो मैं जानूँ, और अपनी छोड़ दे ये हुक्मरानी तो मैं जानूँ बादशाहत के नशे में चल रहा है झूम कर तू, बिन नशे के जी ज़रा ये ज़िंदगानी तो मैं जानूँ, हो गए गद्दीन...

ग़ज़ब है

ये सभी कहते हैं,दुनियां बे-सबब है, पर कोई मरना न चाहे ये ग़ज़ब है !! यूँ बज़ाहिर तो तग़ाफ़ुल है बहुत सा इसकी तह में जो हक़ीक़त है अजब है, अहले दुनियां कुछ नई तो है नहीं, जो समां पहले था वो ही ...

ढंग मुख़्तलिफ़ थे

तकलीफ दी सभी ने.... बस ढंग मुख्तलिफ़ थे, ------------------------ कभी बज़्म में बुलाकर, कभी बज़्म से हटा कर... कभी आसमां दिखा कर, कभी मुंह के बल गिरा कर, कभी दिल से दिल मिला कर, कभी दिल से कुछ जुदा कर. कभी अंजुम...

ख़ूबियाँ कोई नहीं

अहसास----- राह जो चलनी है इसमें खूबियाँ कोई नहीं, रूह-ए-खुद को छोड़ के वक़्त-ए-गिरां कोई नहीं, पथ्थरों के आदमी हैं और दहर जलता हुआ, चिलचिलाती धूप है ऑ आशियाँ कोई नहीं, और कितना आज़माना,...

ख़ाक की इज़्ज़त

Meri izzat hai,aapki izzat, Ye hii kah-kah ke saaf kii izzat, Hamne jab khaas hii sanbhaalaa ise, Ahle duniyan ne kha'aq kii izzat, Apna darza hii kuchh nahin thahraa, Sabse aalaa thii sa'ab kii izzat, उर्मिला माधव 14.4.2014

संगदिल

आज कल वो होगए हैं संग दिल, आदतन यूँ भी हैं वो कुछ तंग दिल, हम रक़ाबी में सजा कर ले गए , कितना सुंदर ख़ुशनुमाँ नौरंग दिल, इससे बढ़ कर बेरुख़ी होती भी क्या बा-अदब लौटा दिया बैरंग दिल...

उतर कर आ रही हूँ-- नज़्म

बात ऐसी मैं तुम्हें बतला रही हूँ, ख़ास मंज़िल से उतर कर आ रही हूँ, कुछ धुएं थे और थे बादल बहुत से, आमिरों की शक्ल में पागल बहुत से, कुछ असीरी में बंधे थे ख़ुद ब खुद ही, पाँव भी ज़ंजीर थे ...

हासिल न था

एक तो हरगिज़ हमें रहबर तलक़ हासिल न था, उस पै कुछ तेरा सहारा भी महे-क़ामिल न था, रात को एक बज़्म में शिरक़त हमारी थी ज़रूर, जाने क्यों ऐसा लगा के हम वहीँ थे,दिल न था, बारहा कई रंग हमसे,  ख़ू...

मंसूब हो जाएं

इबादत से अगरचे हम......बहुत मंसूब होजाएं, तो लाज़िम है ज़माने की नज़र में ख़ूब हो जाएं, किसी दिल में क़दम रखना भी कार-ए-पुख्ता कारा है, ज़रा नज़र-ए-इनायत हो......कि बस महबूब हो जाएं, हज़ारों जान स...

चिलचिलाती धूप है

सामने ये चिलचिलाती धूप है,? या तुम्हारा छद्म वेशी रूप है ? बस इसी जंगल में तुमको देखती हूँ, ख़ुश्क पत्तों को सदायें भेजती हूँ, जब हवा बनकर गुज़रते हो यहाँ से, धीमी सी आवाज़ आती है वह...

ख़ूब बन गए

ख़ाना-ए-हुस्न छांट के माशूक़ बन गए, दिल से उतर गए जो बहुत ख़ूब बन गए, अव्वल तो बात ये के तमाशा बहाल था, ख़ामोश हम खड़े थे कड़ी धूप बन गए, Khana-e-husn chhant ke maashok ban gae, Dil se utar gae jo bahut khoob ban gae,

जंजीर से

"हम बँधे क्यूँ आज भी ज़ंजीर से, कौन वाक़िफ़ है जिगर की पीर से?, शोहदों के बेसबब जुमले सभी, चीर जाते हैं दिलों को तीर से, हक़ की आज़ादी कभी पाई नहीं आँख डरती ही रही शमशीर से, बदनीयत ...