संभलता दिल नहीं अपना
☺️☺️☺️
संभलता दिल नहीं अपना,वो गैरों से उलझते हैं,
न जाने क्यूँ उछलते हैं,न जाने क्यूँ किलकते हैं,
तवज्जो ही नहीं देता कोई उनकी अदाओं पर,
बहुत बेबाक़ लहजे में,न जाने क्या वो बकते हैं ,
रहम करदे ज़रा उन पर,मेरे परवरदिगारा तू,
बहुत मजबूर बेचारे, तड़पते हैं,बिलखते हैं......
उर्मिला माधव...
1.5.2014...
Comments
Post a Comment