रंग देखो
दोस्ती में दुश्मनी का रंग देखो,
रौशनी की आँधियों से जंग देखो,
दोस्तों तुम बेवफा भरपूर रहकर,
मेरी दुनियाँ का निराला ढंग देखो,
छूटती साँसें हुयीं हैं आज काफ़िर,
उम्र का भी दायरा अब तंग देखो,
हर कोई तनहा गया है इस जहाँ से,
जा नहीं सकता कोई अब संग देखो,
देख कर हालत मेरी जो शादमां थे,
आज वो सब रह गये हैं दंग देखो,
उर्मिला माधव...
1.5.2014...
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