सत्य कैसे देख लोगे
आत्मा ही दिग्भ्रमित है,सत्य कैसे देख लोगे,
स्वार्थ अंतर में निहित है,सत्य कैसे देख लोगे,
दृष्टि दूषित होगई,तब व्यर्थ ही दृष्टांत हैं सब,
दोष भी इच्छा जनित है,सत्य कैसे देख लोगे,
व्यक्ति है स्वच्छंद,आपनी धारणा के मूल पर ही,
यदि ह्रदय ममता रहित है,सत्य कैसे देख लोगे,
छद्मवेषी होगया व्यक्तित्व मानव जाति का अब
गर्जना हिंसा सहित है,सत्य कैसे देख लोगे,
मैं,मुझे,मेरा कहाँ तक है उचित,खुल कर विचारो,
जिसमें केवल अपना हित है,सत्य कैसे देख लोगे
उर्मिला माधव...
1.5.2015...
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