ख़ूब बन गए

ख़ाना-ए-हुस्न छांट के माशूक़ बन गए,
दिल से उतर गए जो बहुत ख़ूब बन गए,

अव्वल तो बात ये के तमाशा बहाल था,
ख़ामोश हम खड़े थे कड़ी धूप बन गए,

Khana-e-husn chhant ke maashok ban gae,
Dil se utar gae jo bahut khoob ban gae,

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