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Showing posts from February, 2018

नज़र रखिये

अपने जज़्बात पे नज़र रखिये, दिल की हर बात पे नज़र रखिये, अश्क़ बहना तो बे-गुनाही है, सिर्फ़ तादात पे नज़र रखिये, ग़म पसे पर्दा-ए-हि जा ब रहें, अपने हालात पे नज़र रखिये, दर्द हद से गुज़रना ठी...

बेवफा दोस्त को

बे-वफ़ा दोस्त को ...सीने से लगाए रख्खा, उसने भी झूठ को हर दर्ज़ा निभाये रख्खा, उसकी ख़ामोश सी रंजिश को हवा देते रहे, हमने मुस्कान को होठों पै सजाये रख्खा, हम दिखाने में कसर किसलिए रख...

निकल पाते हैं

ग़ैर की छोड़िये,अपनों की ज़ुबाँ क्या कहने पैने अलफ़ाज़ हैं,कब दिल से निकल पाते हैं समेटें चाहे मगर फिर भी बिखर जाएंगे, ख़्वाब तो ख़्वाब हैं,बस नींद में पल पाते हैं ग़ैर पै उंगली उठाना...

आसान हूँ

सब समझते हैं बहुत आसान हूँ, जैसे मैं दिलजोई का सामान हूँ, दिल्लगी करते हैं मुझसे बेसबब, बेरुख़ी का मैं अजब उन्वान हूँ, मेरी जानिब से सभी आज़ाद हैं, मैं तो अपने आप में ज़िंदान हूँ, म...

यक़-ब-यक़

तीन शेर--- ----------- आज ये ज़ाहिर हुआ है यक-ब-यक, साथ भी देगी नहीं जब सांस तक , राब्ते अब तक रहे जो राह से, क्या चलेंगे आख़री एहसास तक ?? कोई भी यकता नहीं इस खेल में, हो गए ख़ामोश ख़ासम ख़ास तक..... उर्मि...

संवरते रहे

चाह मिलने की लेकर.....संवरते रहे, सीढियां घर की......चढ़ते-उतरते रहे , उनकी गलियों का नक्शा लिए हाथ में, कुछ लकीरों से कागज़ को भरते रहे.. क्यूंकि हिम्मत हमारी दगा दे गयी, दिल ही दिल में अ...

सभी कन्याओं को समर्पित

ज़बरन पैदा होगये वरना हमको लोग भगा देते, अगर ज़रा भी बस में होता जिंदा ही दफ़ना देते, क़िस्मत के आगे दुनिया का जोर न चल पाया वर्ना, लोगों के ग़र बस में होता,वहीँ कहीं सुलटा देते.... #उर्...

सजा रहा है कोई

janab Ahmad faraz ji ki zamiin par filbadih men likhi gai gazal--- misra (Ghum e hayaat ka jhagra mita raha hai koyi. Chale bhi aao k duniya se ja raha hai koyi. ) ----------------------------------------------------------------- bade adab se mujhe ye bataa rahaa hai koii, abhii n jaao abhii,milne aa raha hai koii, mujhe supurd-e-zamiin der se kiyaa jaaye, ke waqtii taur ka rishta nibhaa rahaa hai koii, ajab chalan hai zamaane ka ek zamaane se, mare hue kii lahad kyon sajaa raha hai koii, mujhe khabar hai mera or kya-kya hona hai, vajood-e-jism ka qissa mita raha hai koii, isii jahaan men,mujhse hai koi wabasta, lo meri maut ka qarzaa chuka raha hai koii main ab to khaak hun,nazron men is zamaane ki ajab junoon hai ke ab bhi aa raha hai koii Urmila Madhav 27.2.2016

थी ही नहीं

अपनी कोई बिसात थी ही नहीं, बस तो फ़िक़्र-ए-हयात थी ही नहीं, अब मुहब्बत भी कोई क्या करता, मुझमें कोई ख़ास बात थी ही नहीं, ये तो किस्मत की ख़ास ख़ूबी है, गोकि कोई चाँद रात थी ही नहीं, सबसे क...

नज़्म

बेसबब उलझे रहे एक ख्वाब मेँ हम रात भर किस जहाँ मेँ खो गए समझे नहीं हम रातभर दम-ब-दम हम जा रहे थे जानिब-ए-मन्जिल मगर जाने वो क्या राह थी चलते रहे हम रात भर कोई सहलाता रहा सर गोद मेँ ...

हम किसके हैं

एक मतला तीन शेर--- ============ मुरली वाले राधा के हैं, ये बतलाओ हम किसके हैं?? :( खुशियाँ लेकर नाच रहे सब, दुनियाँ भरके गम किसके हैं?? :( करें मुहब्बत सर पर रखलें इतने हसीं सनम किसके हैं?? :( आला ख़ुद ...

ज़रूरी नहीं

तीन शेर---- ये हकीक़त है आलिम नहीं हूँ मगर, बढ़ के पीछे हटूं........ये ज़रूरी नहीं, आप अपनी कहें,और मैं अपनी कहूं, ज़ावियों से कटूं.........ये ज़रूरी नहीं, हो ये मुमकिन कि सानी नहो आपका!! फिर भी मैं जा ...

एक मतला एक शेर

एक मतला एक शेर पाँव मेरे हैं ज़मीं पर,आसमां पर है नज़र, पीठ दुनिया की तरफ है,पर नहीं हूँ बे-ख़बर, है इरादों में बुलंदी और चमक,आँखों में है, किस तरह होगी भला परवाज़ मेरी मुख़्तसर, उर्मि...

ख़ातून दिल्ली की

दिल्ली की औरत------ एक नज़्म  हालत-ए-हाज़िरा पर... लो मेरी दास्तां सुन लो मैं हूँ ख़ातून दिल्ली की, हिली जाती है अब बुनियाद,अफ़लातून दिल्ली की, नहीं महफूज़ अस्मत है,के दिल में ख़ास दहशत है, ...

ऊंची उड़ान

इतनी ऊंची उड़ान मत करना, चाह को आसमान मत करना, बात कहना तो वो मुक़म्मल हो, अपनी झूठी ज़बान मत करना, itnii oonchii udaan mat karnaa, chaah ko aasman mat karnaa, baat kahnaa to wo muqammal ho, apnii jhoothii zabaan mat karnaa... उर्मिला माधव... 25.2.2014..

एक मतला हम्द से

Ek matlaa Hamd se.... जिसमें रब की दुआ न शामिल हो, वो इबादत हराम है मुझको, जिसमें रब की रज़ा न शामिल हो, वो इजाज़त हराम है मुझको... :: Jismen rab ki dua n shamil ho, Wo ibadat haraam hai mujhko, Jismen rab ki razaa n shamil ho, Wo ijazat haraam hai mujhko... Urmila Madhav... 25th February 2016

मुस्कुराता है

तू मुझे याद अब भी आता है, रोज़ ख्वाबों में मुस्कुराता है, दिल मगर टूट जो गया है अब, लाख चाहूँ न गुनगुनाता है, बीते लम्हों की याद आते ही, हौसला रोज़ डगमगाता है, तेरी आमद से ये हुआ आख़ि...

तहज़ीब रख्खी ताक़ पर

हाज़िर-ए-हालात हैं,तहज़ीब रक्खी ताक़ पर, रंग में कालक मिलाई और घुमाया चाक़ पर दिल में लाखों मैल लेकर,दिल मिलाने आगये, बे-हयाई का चलन है समझें हैं बेबाक़ पर.... अब वो रंगा-रंग जैसा होलिय...

शरारत कर बैठे

इस दिल में अबस इक आग लगी, हम ख़ुद से बगावत कर बैठे, बेताबी-ए-दिल जब हद से बढ़ी, घबरा के मुहब्बत कर बैठे, अय जाओ मियां तुम आज तलक, इक ग़म का रोना रोते हो, एक रोज़ ये हमसे भूल हुई, सहरा से अदा...

संभलता नहीं है

ग़म बहुत है संभलता नहीं है, बोझ ये मुझसे चलता नहीं है, क्यूँ है ख़ामोश ये शहर इतना, कोई राहों पे चलता नहीं है किससे पूछें निशाँ मन्ज़िलों के, एक भी शख़्स मिलता नहीं है, बेवजह को...

नज़्म

उसकी गुफ्तार है,काग़ज़ पै सियाही अब तक, जिसने क़िरदार से हरगिज़ न निबाही अब तक, चार लफ़्ज़ों में दिलासा जो दिया ग़म के तईं, उसकी करता है फ़क़त क़र्ज़ उगाही अब तक.... उर्मिला माधव, 23.2.2016

उगाही अब तक

उसकी गुफ्तार है,काग़ज़ पै सियाही अब तक, जिसने क़िरदार से हरगिज़ न निबाही अब तक, चार लफ़्ज़ों में दिलासा जो दिया ग़म के तईं, उसकी करता है फ़क़त क़र्ज़ उगाही अब तक.... उर्मिला माधव 23.2.2015

फ्री वर्स

जिंदगी, ठहरी हुई झील सी, और ये बिखरी हुई सी बीनाई मंज़रों की दिलकशी, खोई हुई सी, शाम है धुंआ-धुंआ, और फ़लक सुनसान सा, गो के बिन माह-ओ-अख्त़र सा, ग़म मगर छाती पर, जिरह बख्तर सा, न तीर,न तलव...

याद इतना आ रहा है

कौन मुझको याद इतना आ रहा है, वक़्त फिर से रतजगा,दोहरा रहा है, नींद आँखों से उड़ी जाती है मेरी, और अँधेरा,इस क़दर,गहरा रहा है, ये जो है सैलाब मेरे आंसुओं का, मेरे दिल को बे-वफ़ा ठहरा रहा ...

नज़्म

कितने मुखौटे लेके जीते हैं, ज़ख्म सींते है, आंसू पीते हैं, खूब हँसते हैं, मन में रीते हैं, कैसी-कैसी, दुहाई देते हैं, हर तरह ढूंढते, सुभीते हैं, सांस रूकती है, फिर भी जीते हैं, तुम भ...

घर जाते हैं

हम जो बारिश में कभी भीग के घर जाते हैं, यक़ता आँखों की चमक देख के डर जाते हैं, आईना देखें नहीं,इतनी क़सम दी खुद को, लाख़ बचते हैं मगर फिर भी उधर जाते हैं, हमने लोगों से कभी कोई भी शिकव...

वाह वाह करते रहे

लोग सब वाह-वाह करते रहे, हम हज़ारों गुनाह करते रहे, जैसे भी हो सका जहां भर में, इक मुहब्बत की चाह करते रहे, रोने वालों को सबने रोने दिया, अपने जीने की राह करते रहे, रोने-धोने से क्य...

जज़्बात आदमी

माने कि या न माने मेरी बात आदमी, रखता नहीं है कोई भी औक़ात आदमी, देता फिरे ख़िताब ही एक दुसरे को रोज़, ख़ुद ठग रहा है आपही जज़्बात आदमी, दिल भी मिले ज़रूरी नहीं,हाथ ही मिले, पहचानता है आ...

नज़्म

हर सिम्त लुटेरे बैठे हैं, जागीर उजड़ने वाली है, ऐ परदानशीं अब आजाओ, तक़दीर बिगड़ने वाली है, तुम छोड़ गए हो उलझन में, मासूम मुहब्बत डरती है, इन आती जाती साँसों की, अब डोर बिछुड़न...

मिट्टी का एक बर्तन

मिट्टी का एक बर्तन बाज़ार से लेआओ, और उसके चन्द टुकड़े तुम राख में दबाओ और रेशमी क़फ़न से एक लाश को सजाओ, सन्दल,अग़र की ख़ुशबू,लोबान भी जलाओ, ग़र हो सके जो मुमकिन तो हार भी चढ़ा...

नज़्म

जब हुस्न का आलम था,ज़ुल्फ़ों में पेच-ओ-ख़म था, दिल कूचा-ए- जानम था,सर पे न कोई ग़म था, क़दमों तले जहाँ था,बाँहों में आसमां था, परवाज़ बे-अलम थी,मेरे साथ एक सनम था, क्या दास्ताँ सुना...

सुहानी है

किससे,कितनी,कहाँ निभानी है, फ़िक़्र क्या,ज़ीस्त आनी-जानी है, ये तो रिश्ते हैं, .....ग़म गुसारी के, इसमें दुनियां .....कहाँ सुहानी है? तुम समझते हो हम ही नादाँ है? दिल ....तजुर्बों की राजधानी ह...

कम नहीं साहिब

एक मतला तीन शेर--- ----------------------- ग़म तो हमको भी कम नहीं साहिब, वक़्त सा पर मरहम नहीं साहिब, रख के ज़ानूं पे सर को,रोया करें, इतने कमज़ोर हम नहीं साहिब, हमको मग़रूर मत कहो हरगिज़, क्यूंकि गरदन में ख़म...

बरमला करदे

अगर दूरी मुआफ़िक है तो दूरी बरमला करदे, भला फिर रंज-ओ-ग़म कैसा सभी कुछ बेमज़ा करदे, दर-ओ-दीवार की सीलन,वहीं कुछ झांकती शाखें, सही क्या है इमारत पर ज़रा कुछ तब्सरा करदे, उर्मिला माधव.. ...

नज़्म

क्यूँ मुझे बेटी की सूरत बख्श दी, दूसरों के घर को जब अपना कहा, पूछ तो लेते के दिल का क्या हुआ ? आपके खूंटे की गैय्या थी ज़रूर, पर कहो इसमें कहाँ मेरा कसूर? किसलिए मुझको किया नज़रों से...

चल पाया नहीं

क्या किया जाता अगर ये दिल संभल पाया नहीं, रूह पर लिख्खा हुआ कुछ भी बदल पाया नहीं, टूट कर ये जिस्म-ऑ-जां, लडखडाते रह गए, उसपे भी ये दर्द फिर बाहर निकल पाया नहीं, इस किताब-ए-ज़िन्दगी क...

दिलवाले भी होते हैं

आने वाली ग़ज़ल का मतला--- इस दुनियां में अच्छे-अच्छे दिल वाले भी होते हैं, उन्हें ख़बर क्या गोरे चेहरे, दिल काले भी होते हैं, उर्मिला माधव, 19.2.2017

गीत

दुनियाँ कैसे चले मुझे देखने का चाव|| एक नदी में जितने धारे, बीच भंवर से करें इशारे, पार चले तो सुनले प्यारे, तू भी आजा साथ हमारे, दुनिया कैसे चले मुझे देखने का चाव|| जो डूबा है उसन...

चोट कर जाए

एक बार फिर... --------------- वो जो रह-रहके चोट कर जाए, अपने अलफ़ाज़ से..मुकर जाए, आशिक़ी,इश्क एक फजीहत है, जिसको रोना हो वो इधर जाए, दर्द से दिल नहीं मुक़ाबिल हो, खैरियत से ही अब गुज़र जाए, मुझको हंसने ...

फ्री वर्स दर्प से अकड़े हुए चेहरे

दर्प से अकड़े हुए चेहरे, थक तो जाते होंगे, लगता है  भय पास जाने से, अकड़ सकती है और,अकड़ी हुई गर्दन, उचित कुछ दूरियां,सद्भावना वश, जी रहे अहम् में,कुछ बहम में, घाव भीतर सीं रहे,चुप्प...

फैसला हो एक बार

अपने दिल को तोडना अच्छा नहीं है बारबार, दर्द की जद में हो चाहे...फैसला हो एक बार, :: हर अना को तोड़ कर इमकान मत कीजे जनाब, हर कोई है मस्त ख़ुद में,कौन किसका ग़मगुसार, :: ज़हमतें क्यों मोल ल...

तस्वीर देखिए

अब ताज़ीरात-ए-हिन्द की तस्वीर देखिये, हर ज़ाविये से मिट रही तक़दीर देखिये, कुछ ठीकरों में बेचता इंसान अपने ख्वाब, चलती कहाँ है कोई भी तदबीर देखिये, उफ़ गर्द में निहां है यहाँ आदमी...

नज़्म

ज़मीं भी चाहिए मुझको,मकां भी चाहिए यारब, बहुत खुशियों से वाबस्ता,जहां भी चाहिए यारब जहाँ ग़मगीन होकर कोई भी रोता न हो हरगिज़, मुझे पुरजोश दुनियां का समां भी चाहिए यारब, मगर ये या...

हद में बतलाए गए

पुराने पन्नों से------- --------------------- हम सज़ा की हद में बतलाये गए हैं , और यहाँ तक खींच कर लाये गए हैं , किस सजा के मुस्तहक हम होगये हैं, जाने क्या-क्या जुर्म बतलाये गए हैं ?? मोहमल इलज़ाम हैं हम मुत...

चुक गए

Chuk gaye tum or ham bhi chuk gaye Sab yahin aakar achanak ruk gaye, चुक गए तुम और हम भी चुक गए, सब यहीं आकर अचानक रुक गए, Jo chale tan kar jahan main umr bhar, Rasta chalte hii chalte jhuk gaye, जो चले तन कर जहाँ में उम्र भर, रास्ता चलते ही चलते झुक गए... उर्मिला माधव, 16.2.2917

कमाल करते हैं

तोड़ कर दिल सवाल करते हैं, दुनियाँ वाले ..कमाल करते हैं, आपकी मुश्किलों के दीदावर, रंज से .....मालामाल करते हैं, उर्मिला माधव 16.2.2017

नज़्म

वो भी शायद रहगुज़र में साथ थे, मैंने उनको पर कभी देखा न था, क्यूँ न देखा उनको मेरी आँख ने, इस क़दर मेरा चलन,ओछा न था, क्यों किसीकी ज़िन्दगी में झांकना, मेरी नज़रों में ये सब अच्छा न था, ...

चलो छोड़ो

तमाशा बन गया आक़िल सरे महफ़िल,चलो छोड़ो, जलाया हर तरह से दिल सरे महफ़िल,चलो छोड़ो, नहीं आदत हमें हरगिज़ भी..रोने गिड़गिड़ाने की, सरापा हो गए बिस्मिल सरे महफ़िल,चलो छोड़ो, पसे पर्दा रखे ग़म ...

गुफ़्तगू के दरमियाँ

गुफ्तगू के दरमियां कल इक अजब किस्सा हुआ, नींव का पथ्थर लगा हमको बहुत खिसका हुआ, कशमकश में घूमते हम रह गए दीवानावार, रात भर हमने समेटा जब यकीं बिखरा हुआ, ज़िन्दगी भर के तजरिबे ह...

शोलों पे कौन चलता है

ये जो लावा सा बह निकलता है, पहले सीने में ख़ूब जलता है, सारी ये क़ारसाज़ी दिल की है, वर्ना शोलों पै कौन चलता है ? एक बस दर्द ही है जो हरदम, वक़्त के साथ रुख़ बदलता है।।.... उर्मिला माध...

नज़्म

इंतिहा हो या आग़ाज़,फ़ानी है,बंदा नवाज़, दहर की रानाइयां हों, जिस्म की गोलाइयां हों, जा-ब-जा शहनाइयां हों, या बहुत तन्हाइयां हों, बज रहा जो दिल का साज़,फ़ानी है,बन्दानवाज़, नफरतों का रं...

काम सब

करने आए थे हमें बदनाम सब, कर नहीं पाए मगर ये काम सब, जो ये कहते थे खुदी को कर बुलंद, वो ही बैठे हैं जिगर को थाम सब, बेचने को आए हम भी ज़िन्दगी, कर गए साबित हमें बेदाम सब, अब सबीलों की दर...

नज़्म

नींद हमारी ख़्वाब हमारे, चेहरे के सब ताव हमारे, दिल,गुर्दा और बात जिगर की? ये माल-ओ-असबाब हमारे, फिर हम क्यूँ पामाल रहेंगे? क्यूँ नाज़-ओ-अन्दाज़ सहेंगे? किसने तुम्हें बुलाया औ...