नज़्म
हर सिम्त लुटेरे बैठे हैं,
जागीर उजड़ने वाली है,
ऐ परदानशीं अब आजाओ,
तक़दीर बिगड़ने वाली है,
तुम छोड़ गए हो उलझन में,
मासूम मुहब्बत डरती है,
इन आती जाती साँसों की,
अब डोर बिछुड़ने वाली है।।......
उर्मिला माधव.
20.2.2013
हर सिम्त लुटेरे बैठे हैं,
जागीर उजड़ने वाली है,
ऐ परदानशीं अब आजाओ,
तक़दीर बिगड़ने वाली है,
तुम छोड़ गए हो उलझन में,
मासूम मुहब्बत डरती है,
इन आती जाती साँसों की,
अब डोर बिछुड़ने वाली है।।......
उर्मिला माधव.
20.2.2013
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