नज़्म
नींद हमारी ख़्वाब हमारे,
चेहरे के सब ताव हमारे,
दिल,गुर्दा और बात जिगर की?
ये माल-ओ-असबाब हमारे,
फिर हम क्यूँ पामाल रहेंगे?
क्यूँ नाज़-ओ-अन्दाज़ सहेंगे?
किसने तुम्हें बुलाया और क्यूँ?
बे-मतलब ख़्वाबों में आए ,
दिल से इस्तक़बाल कराके,
क्या-क्या ना अन्दाज़ दिखाए!
और बे-वफ़ा कहकर हमको,
बे-वजहा इल्ज़ाम लगाए,
हमको नहीं ज़रूरत उसकी,
जो ख़ुशियों में आग लगाए।।
पामाल--पद दलित Urmila Madhav..
इस्तक़बाल--स्वागत
13.2.2013
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