मुस्कुराता है
तू मुझे याद अब भी आता है,
रोज़ ख्वाबों में मुस्कुराता है,
दिल मगर टूट जो गया है अब,
लाख चाहूँ न गुनगुनाता है,
बीते लम्हों की याद आते ही,
हौसला रोज़ डगमगाता है,
तेरी आमद से ये हुआ आख़िर,
कुछ अँधेरा भी जगमगाता है,
की है हर दायरे की पैमाइश,
ज़ाविया देख लडखडाता है,
मैं हिफाज़त के साथ सोती हूँ,
ख़्वाब में कौन बड़बड़ाता है,
मैं मगर रोज़ उठके चलती हूँ,
दर मेरा कौन खटखटाता है....
उर्मिला माधव....
25.2.2016
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