नज़र रखिये
अपने जज़्बात पे नज़र रखिये,
दिल की हर बात पे नज़र रखिये,
अश्क़ बहना तो बे-गुनाही है,
सिर्फ़ तादात पे नज़र रखिये,
ग़म पसे पर्दा-ए-हिजाब रहें,
अपने हालात पे नज़र रखिये,
दर्द हद से गुज़रना ठीक नहीं,
इसकी इफ़रात पे नज़र रखिये,
दिन का ढलना तो तयशुदा ही है,
अब तो बस रात पे नज़र रखिये,
उर्मिला माधव....
1.3.2015
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