नज़्म
बेसबब उलझे रहे एक ख्वाब मेँ हम रात भर
किस जहाँ मेँ खो गए समझे नहीं हम रातभर
दम-ब-दम हम जा रहे थे जानिब-ए-मन्जिल मगर
जाने वो क्या राह थी चलते रहे हम रात भर
कोई सहलाता रहा सर गोद मेँ रख कर मेरा
और उसी अन्दाज़ मेँ सोते रहे हम रात भर
प्यार के उस गीत को कोई रात भर गाता रहा
और उस आवाज़ को सुनते रहे हम रात भर।।
उर्मिला माधव
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