सिसकती हसरतों के दाग़ कितनी दूर ले आये, रहीं मजबूरियां तारी खुदी से दूर ले आये, उजालों की हक़ीक़त से ज़माना ख़ूब वाकिफ है, लो अब हमने जलाया दिल हवा में नूर ले आये उर्मिला माधव
अहले ग़म हैं,पर्दा दारी रखते हैं, मर जाने की सब तैयारी रखते हैं, ग़ालिब हो जाना ही ऊंची बात नहीं, अपनी दम पर हम ख़ुद्दारी रखते हैं, कोई रहबरी नहीं चाहिए दुनियां की, चाहे कुछ हो दूर क...
मेरी इन ख़ामोशियों के ज़र्फ़ को मत तौलिए, आपको अपने लिए शर्मिन्दगी हो जाएगी... आपने जितना किया है,उतना मैं भी कर चलूँ, वरना मेरे नाम कुल ,आवारगी हो जाएगी.. ****** Meri in khamoshiyon ke zarf ko mat takiye, Aapko apne liye,sharmindagi ho jaegii...... Aapne jitna kiya hai,utna main bhi kar chalun, Warna mer...
मेरी इन ख़ामोशियों के ज़र्फ़ को मत तौलिए, आपको अपने लिए शर्मिन्दगी हो जाएगी... आपने जितना किया है,उतना मैं भी कर चलूँ, वरना मेरे नाम कुल ,आवारगी हो जाएगी.. ****** Meri in khamoshiyon ke zarf ko mat takiye, Aapko apne liye,sharmindagi ho jaegii...... Aapne jitna kiya hai,utna main bhi kar chalun, Warna mer...
एक प्रयास हिंदी में, ------------------- मन हुआ अनमना तो,भजन कर लिया, लेके गंगा का जल आचमन कर लिया, बैठे आसन पे भी पालथी मार कर, जग के हर देवता को नमन कर लिया, जाने कितनी तरह से किया कीर्तन, अपने हा...
दोस्त के साथ तो खड़े रहना, पर गलत शख्स के परे रहना, बात अच्छी है कुछ यकीन रखो, धोखे बाज़ों से बस डरे रहना, जो भी जैसा है उसको रहने दो, सिर्फ नीयत से तुम,खरे रहना, झूठ में कुछ भी दम नही...
रात हम नींद से जगाये गए, बा-जबर होश में भी लाये गए, हम जहाँ थे वहां पे थे ही नहीं, ख्वाब में खोये से बताये गए, अपनी दुनियां में लौट आये हम, उनकी यादों से जब हटाये गए, जो थे असबाब अपने ...
अब तक मुझको ये अंदाज़ा लग पाया है, किसने मुझको झूठा नक्शा दिखलाया है, ज़ह्र के चश्मे ख़ास हवा में मिल जाते है, बैसाखी से कोई कहाँ तक चल पाया है? तय रहता है चार क़दम पर ठोकर खाना, गिरने...
मुहब्बत को इशारों में समझना कामयाबी है, ये मौके की नज़ाक़त है तो हां में हां मिला दी है, किसीउम्मीद का जज़्बा,हदों के पार जा पहुंचा, वो कबका जा चुका है,कब कहाँ उसने सदा दी है उर्मि...
ज़िन्दगी के खेल में, दो दिलों के मेल में , चुहल और कुलेल में, सावधानी ज़रूरी है उम्र भर निबाह में , गैर की निगाह में , मुश्किलों की राह में, निगहबानी ज़रूरी है बचपन के बस्ते में, और कि...
इल्तिज़ा उसने मेरी मानी कहाँ, पर मिरे भी सब्र का सानी कहाँ, कांपती आवाज़ में रोका किये, उसने वो आवाज़ पहचानी कहाँ, सूखती है ये सरापा भीग कर, इश्क़ की बुनियाद में पानी कहाँ, मैंने उस...
एक मतला तीन शेर----- थोडा रुक जाओ मुझे बच के निकल जाने दो, अपनी उल्फत से ज़रा हंस के निकल जाने दो, तुमको देखे से ......नज़र तुम पे ठहर जाती है, चेहरा चिलमन में रखो,छुप के निकल जाने दो, किसकी ख...
तरही ग़ज़ल-- किस्सा सुना रहे हैं ये वक़्त-ए-शाम किसका, इस गुफ़्तगू में आख़िर उट्ठा है नाम किसका, नामा निगार बनके आया है आज क़ासिद, लाया है देखो ख़त में,किसको सलाम किसका, नीलाम हो रहे हैं ...
ज़रूरतमंद हूँ लेकिन कोई कासा नही रखती, इरादा जो भी रखती हूं कभी आधा नहीं रखती, मेरी आवाज़ का हिस्सा फ़लक तक भी पहुंचता है, जो कहती हूँ बुलंदी से,ज़ुबाँ सादा नहीं रखती, मेरे खूँ में ...
इक खुशी का सफ़र नहीं देखा, कौन सा काम कर नहीं देखा, मैं बहुत होश में नहीं हूं अभी, इक ज़माने से घर नहीं देखा, बंद आंखों से पूरी दुनियां को, देख सकती थी पर नहीं देखा, ख़ूब चाहा था,अहले द...
पुराने पन्नों से----!! ------------------!! हमें किसीसे गिला ही क्यूँ हो ?? जिसे जो कहना हो कहले आके, के जिस चलन से निबाहीं हमने, कभी तो कोई यूँ सहले आके, जिसे हो दावा बुलन्दियों का, कटा ले गरदन वो पहले...
ये हमारी ज़िन्दगानी और हम, उम्र भर ही नातवानी और हम, हम अकेले और इतने !!मरहले, रोज़ इक बनती कहानी और हम, वक़्त लाया बाम पर हम आगये, उफ़ हमारी बे-ज़बानी और हम, बे-अदब जुमले निशाने साध कर, शो...
मेरी एक बहुत पसंदीदा रचना... सखियाँ कहतीं,साजन के बिन प्यार अधूरा लगता है, अम्मां कहतीं काजल बिन....सिंगार अधूरा लगता है, चाहे जितनी बिजली चमके,घर की सभी मुंडेरों पर, बिन बरखा के ...
फानी बदायूँनी सा'ब की ज़मीन पर--/ हम बहुत मजबूर होकर दर-ब-दर देखा किये, जाने वाले राह तेरी उम्र भर देखा किये देखते ही देखते हर रंग किस्मत ले उड़ी, कुछ नहीं था फिर भी जाने क्या उधर देख...
गुफ्तगू के दरमियां कल इक अजब किस्सा हुआ, नींव का पथ्थर लगा हमको बहुत खिसका हुआ, कशमकश में घूमते हम रह गए दीवानावार, रात भर हमने समेटा जब यकीं बिखरा हुआ, ज़िन्दगी भर के तजुरबे ह...
हमने अंदाज़ अपना ख़ास रखा, दिल सरे शाम से उदास रखा, ये मेरा दिल ऑ ग़ैर की महफ़िल, दिल बहुत दर्द से हस्सास रखा, दुश्मनी खुद से हमने कर डाली, याद को उसकी अपने पास रखा, उर्मिला माधव 28.8.2015...
जनवरी की सर्द रातें और वो गंगा का पानी, बस वहीँ पर चीख कर चुप हो गई मेरी कहानी, मैं तो उसको रोकती ही रह गई,हर ग़ाम पर, क्या करूँ पर ज़िंदग़ी ने बात मेरी एक न मानी, किसने पाया है सिला अच...
हम बहुत मजबूर होकर दर-ब-दर देखा किये, मरने वाले राह तेरी उम्र भर देखा किये देखते ही देखते हर रंग किस्मत ले उड़ी, दिल बुझा जाता था लेकिन फिर उधर देखा किये । है अजब सी दास्ताँ पर सच ...
आज फिर एक और सुबह, ये तुम्हारी ख़ाली कुर्सी, बनवा देती है कभी तुम्हारे हिस्से की चाय, मैं इसके साथ पीती हूँ अपने हिस्से की चाय, एक चाय यूँ ही रखी रह जाती है जानते हो मैं भी अब थकती ...
खुद मुक़म्मल कर लिए जब दायरे, ज़ख्म दिल के बे-सबब दिखलाये रे, मुतमईन होकर किया हर फैसला, काहेको फिर मन ये अब घबराए रे, इक गुज़ारिश है मेरी लिल्लाह सुन कोई तो जीने का ढब सिखलाये रे, उ...
रात हमने आईना देखा बहुत, और तब अपने तईं सोचा बहुत, इस क़दर हावी हुईं कमज़ोरियाँ ? अपने जी पै तीर,ख़ुद साधा बहुत? पाँव पर है धूप,सर पर आफ़ताब, दिल अबस ही शबनमी,भीगा बहुत, रफ़्ता-रफ़्ता रा...
किसलिए जज़्बात का सौदा करूँ, झूठ से भी कब तलक बहला करूँ, जो मेरी बुनियाद का हिस्सा नही, उसपे नीयत किस लिए ज़ाया करूँ, यूँ भी तो तनहा है हर इक आदमी, बे-सबब ही इतना क्यूँ सोचा करूँ, कौ...
उसके दिल में ख़ामख़्वा ही सिलसिला,चलता रहा, मेरी ख़ामोशी से उसको,हर सिला मिलता रहा.. दिल की ये संजीदगी, और उसका वो आवारापन मेरा उसका राबिता इक शाम सा ढलता रहा, उर्मिला माधव, 25.8.2017
वो आदमी वही है,लहजा बदल गया है, अब दरमियां हमारे, किस्सा बदल गया है, हम मुन्तज़िर रहे हैं,आने की कह गया था, गिनते हैं उँगलियों पर,हफ्ता बदल गया है, लगता है कुछ कमी है,पहचान में हमार...
मुहब्बत किसीसे अगर हो ही जाए , वो बस हादसा है नियामत नहीं है , जो दिल आगया ग़र तुम्हारा किसीपे , तो फिर एक दिन भी सलामत नहीं है , अभी तक तो एक घर भी ऐसा न देखा , जहां दिल पे लानत मलामत नह...
होते पंख अगर जो मुझको उड़कर उनके गाँव को जाती, तब अमरूदों की बगिया मैं छुप कर कहीं बैठ तो पाती, कोई हवा कहीं जो चलती तन मन उनका छू कर आती, उनकी साँसों के चन्दन से मेरा तन-मन भी महका...
तुम सुन रहे हो ना ? क्या कहना है मुझे ? तुम मेरी सांसों के दायरे में क़ैद हो, इसलिए तुम्हारे पास होने वाली हर एक आहट, ख़ुद अपनी ख़बर देती है, चूँकि कई जन्मों से तुम मेरे हो, मैंने तुम्...
क्या करें बात अगर बात नहीं बन पाती, ज़ाती जज़्बे के लिए रात नहीं बन पाती, चश्मे पुरनम थी,ऑ रात थी,सैलाब कई, अपने हाथों कोई बरसात नहीं बन पाती, रोज़ मरते हैं यहाँ ..आहो फुगां वाले भी, म...
कभी शेर-ओ-सुखन अपना कभी नगमा सुनाया है, असल में इन तरीकों से ब-मुश्किल ग़म छुपाया है, रखा पास-ए-अदब मैंने,सभी अहबाब की खातिर, कलेजा देख लो मेरा,....नशेमन तक जलाया है, हज़ारों रंग देखे ...
छोड़ दो दिल से दिल मिलाना क्या ? अब किसी को भी आज़माना क्या ? जो हुआ उसको ख़ूब होने दो, बेवज्ह अपना दिल दुखाना क्या ? तयशुदा बात ही तो गुजरी है, इसलिए यूँ भी अचकचाना क्या? अपने मुंह से ...
जितनी भरनी हों आँखे भर आयें इतनी ज्यादा कि दरिया कर जायें , मरने जीने पे बात जा पहुंचे , गैर मुमकिन है उनके घर जाएँ , जितने दावे किये हैं बढ़-बढ़ के , आज साबित वो आके कर जाएँ, हैं परेश...
अब कोई मंज़र पसे मंज़र नहीं, हम फ़क़ीरों का कोई भी घर नहीं, जो मुक़द्दर में लिखा मिल जायगा, बे-सबब हम घूमते दर -दर नहीं, हम जमा करते नहीं है कौड़ियाँ, इक क़फ़न ही चाहिए,बिस्तर नहीं, कर रहे आ...
उसने कल चेहरे को देखा गौर से, मुझको हैरत सी हुई इस तौर से, रुख़ पै माज़ी की लिखी है हर लकीर, वक़्त ये गुज़रा है जिस-जिस दौर से, उसको अपना जानके बांटा था ग़म, कौन कहता है वगरना और से, इससे प...
आप कहते हैं के ये सच है तो सच ही होगा, सबका लजपाल फ़क़त रब है तो रब ही होगा, लोग कहते हैं ....मेरा क़त्ल सरे महफ़िल हो उसपै होना है अगर अब तो ये अब ही होगा, उर्मिला माधव
एक बहुत ख़ाली सड़क प आंख से ज़्यादा नहीं, इक ज़ुबाँ ख़ामोश हर पल चीख से लड़ती हुई, इक अजब वहशत सी तारी सोज़-ए-पिन्हानी में ग़र्क़, पर कभी देखा नहीं उस ज़र्द पेशानी पे दर्द चार सू खामोशियों ...
चोट खाने के लिए दिल सख्त होना चाहिए, ख़ुद संभलने के लिए कुछ वक़्त होना चाहिए, बात ग़र कहनी रहे तो हौसला रख्खें ज़रूर, हक़ बुलंदी के लिए बस ख़ब्त होना चाहिए, एक दिन का काम तो ये है नहीं स...
जिस्म ही बार नज़र आया,बड़ी दूर तलक, के जहां ख़ार नज़र आया ,बड़ी दूर तलक, हर कलेजे को बहुत देर ठहर छान लिया, गर्द-ओ गुब्बार नज़र आया,बड़ी दूर तलक, जो निगाहों से परखने की कभी जुरअत की, सिर्फ ...
लोग ख़ुद को ही हमेशा,नाख़ुदा समझा किये, दूसरों को शायरों से अलहदा समझा किये, ग़र बड़ी मछली दिखाई दे गई तो वाह ख़ूब, बाकी सारी मछलियों को बस ग़दा समझा किये, मछलियाँ कमसिन अगर हैं,बात द...
कड़े फिकरे कोई कह कर, चला जाता था जो अक्सर, तग़ाफ़ुल उसकी नज़रों में, कभी देखा था जो मैंने, वो मुझको याद आता है।। ज़मीं जब ज़ख़्म धोती थी, फ़लक़ रह-रह के रोता था , कहीं तन्हाई में जाकर, कोई दा...
वक़्त ने भी वो अदा दिखलाई है,दुहाई है, मेरे हिस्से मैं फ़क़त रुसवाई है दुहाई है, चाँद भी मेरी तरह तनहाई मैं डूबा लगा, किसने फिर ये चांदनी फैलाई है दुहाई है, जिसकी खातिर मुन्तजिर ...
आजकल बादल बरसते ही कहाँ हैं, सब्र कर कुछ आगे चल कर देख ले, जो नहीं तुझको यकीं तो ऐसा कर कि अपने क़दमों पर उछल कर देख ले ऐसे मौसम मैं हवा किस रंग मैं है, जिद है तो बाहर निकल कर देख ले, उ...
फ़ालतू बातों में कुछ रख्खा नहीं था, आप जो कहते थे वो अच्छा नहीं था, तंज,दूरी और फ़क़त लानत,मलामत, एक मुहब्बत के अलावा क्या नहीं था ? कितनी ज़्यादः कोशिशें कीं सीखने की, क्या करें हमक...
बहुत बेखबर हूँ, हक़ीक़त बता दूं, तुझे ज़िन्दगी अब कहाँ से सदा दूँ, चमकती है बिजली सी खामोशियों में, अभी मैं भला कैसे घर को सजा दूँ बहुत उम्र गुज़री अजब तीरगी में, ये जी चाहता है के दा...