दुहाई है

वक़्त ने भी वो अदा दिखलाई है,दुहाई है,
मेरे हिस्से मैं फ़क़त  रुसवाई है दुहाई है,

चाँद भी मेरी तरह तनहाई मैं डूबा लगा,
किसने फिर ये चांदनी फैलाई है दुहाई है,

जिसकी खातिर मुन्तजिर थे उम्र भर ,
वो मुहब्बत ही कभी न पाई है दुहाई है,

पथ्थरों के रास्ते,पत्थर के घर हैं जा-ब-जा,
अपने दिल को बात ये समझाई है दुहाई है ,

ये ज़माने की अदालत है अरे ओ नासमझ ,
मरते दम तक भी नहीं सुनवाई है दुहाई है,

उर्मिला माधव ...
२०.८.२०१३

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