नहीं देखा
इक खुशी का सफ़र नहीं देखा,
कौन सा काम कर नहीं देखा,
मैं बहुत होश में नहीं हूं अभी,
इक ज़माने से घर नहीं देखा,
बंद आंखों से पूरी दुनियां को,
देख सकती थी पर नहीं देखा,
ख़ूब चाहा था,अहले दुनियां ने,
मेरी आँखों में डर नहीं देखा,
आहो नाले,फुगां वो सन्नाटे,
मैंने कुछ मुख़्तसर नहीं देखा,
दिल सयाना हुआ,लड़कपन से,
ज़ुल्फ़ को होते सर नहीं देखा,
उर्मिला माधव,
30.8.2017
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