निकल जाने दो
एक मतला तीन शेर-----
थोडा रुक जाओ मुझे बच के निकल जाने दो,
अपनी उल्फत से ज़रा हंस के निकल जाने दो,
तुमको देखे से ......नज़र तुम पे ठहर जाती है,
चेहरा चिलमन में रखो,छुप के निकल जाने दो,
किसकी ख्वाहिश है कभी तुमसे जुदा होने की?
बस गुज़ारिश है मेरी ,अब के निकल जाने दो ....
#उर्मिलामाधव...
30.8.2015
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