बरसते ही कहाँ हैं
आजकल बादल बरसते ही कहाँ हैं,
सब्र कर कुछ आगे चल कर देख ले,
जो नहीं तुझको यकीं तो ऐसा कर कि
अपने क़दमों पर उछल कर देख ले
ऐसे मौसम मैं हवा किस रंग मैं है,
जिद है तो बाहर निकल कर देख ले,
उर्मिला माधव ...
२०.८.२०१३
आजकल बादल बरसते ही कहाँ हैं,
सब्र कर कुछ आगे चल कर देख ले,
जो नहीं तुझको यकीं तो ऐसा कर कि
अपने क़दमों पर उछल कर देख ले
ऐसे मौसम मैं हवा किस रंग मैं है,
जिद है तो बाहर निकल कर देख ले,
उर्मिला माधव ...
२०.८.२०१३
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