देखा किये

फानी बदायूँनी सा'ब की ज़मीन पर--/

हम बहुत मजबूर होकर दर-ब-दर देखा किये,
जाने वाले राह तेरी उम्र भर देखा किये

देखते ही देखते हर रंग किस्मत ले उड़ी,
कुछ नहीं था फिर भी जाने क्या उधर देखा किये,

है अजब सी दास्ताँ पर सच यही है क्या करें,
रौशनी को तीरगी से पुर असर देखा किये

दिल कहाँ राज़ी हुआ और ये तड़पता ही रहा,
पर बहुत मायूस होकर इक नज़र देखा किये।

बदहवासी का वो आलम और कुछ जोशे जुनूँ,
किसको इतना होश था,बस बेख़बर देखा किये

जाने कितनी मुश्किलों का सामना हमने किया,
उम्र भर के हादसों को मुख़्तसर देखा किये,
Urmila Madhav..
29.82016

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