नियामत नहीं है

मुहब्बत किसीसे अगर हो ही जाए ,
वो बस हादसा है नियामत नहीं है ,

जो दिल आगया ग़र तुम्हारा किसीपे ,
तो फिर एक दिन भी सलामत नहीं है ,

अभी तक तो एक घर भी ऐसा न देखा ,
जहां दिल पे लानत मलामत नहीं है  ,

फकीरी की चादर अगर मुंह पे ढक ली ,
तो कुछ भी ,गुज़रना क़यामत नहीं है..
उर्मिला माधव ...
25.8.2013

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