जगाए गए
रात हम नींद से जगाये गए,
बा-जबर होश में भी लाये गए,
हम जहाँ थे वहां पे थे ही नहीं,
ख्वाब में खोये से बताये गए,
अपनी दुनियां में लौट आये हम,
उनकी यादों से जब हटाये गए,
जो थे असबाब अपने हाथों में,
सब के सब ही ज़मीं पे पाए गए,
एक चुन्नी थी,और मोबाइल था,
एक-एक करके सब उठाये गए
सबने पूछा कहाँ हो मोहतरमा,
हंसके बिस्तर पे हम सुलाए गए....
उर्मिला माधव...
31.8.2015
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