नहीं बन पाती
क्या करें बात अगर बात नहीं बन पाती,
ज़ाती जज़्बे के लिए रात नहीं बन पाती,
चश्मे पुरनम थी,ऑ रात थी,सैलाब कई,
अपने हाथों कोई बरसात नहीं बन पाती,
रोज़ मरते हैं यहाँ ..आहो फुगां वाले भी,
मुफ्तखोरी से तो औक़ात नहीं बन पाती,
उर्मिला माधव
क्या करें बात अगर बात नहीं बन पाती,
ज़ाती जज़्बे के लिए रात नहीं बन पाती,
चश्मे पुरनम थी,ऑ रात थी,सैलाब कई,
अपने हाथों कोई बरसात नहीं बन पाती,
रोज़ मरते हैं यहाँ ..आहो फुगां वाले भी,
मुफ्तखोरी से तो औक़ात नहीं बन पाती,
उर्मिला माधव
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