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Showing posts from June, 2019

ज़लज़ला नहीं था कभी

इश्क़ का.....ज़लज़ला नहीं था कभी क्यूंकि दिल आशना  नहीं था कभी, इतना समझो के बस निबाह किया, दरमियाँ सिलसिला नहीं था कभी, उसके चेहरे का बस लिहाज़ किया, उसमें दिल मुब्तिला नहीं था कभी, ब...

आह करते रहो

-----एक मतला दो शेर------- जितने चाहो गुनाह करते रहो, मुझको बस आगाह करते रहो, मुझ पे तुम उंगलियाँ उठाया करो, ख़ुद की बस वाह-वाह करते रहो, तुम तो लाखों नसीब वाले हो, अपना ये है कि आह!! करते रहो, ---...

जाम तो दो

अपने हाथों से मुहब्बत का कोई जाम तो दो, मेरे अहसास की दुनियां को कोई नाम तो दो, तुमको सीखा ही नहीं दिल से मुहब्बत करना, बहते आरिज़ पै मेरे अश्क़ कहीं थाम तो दो उर्मिला माधव

टूट ही रहा था दिल

टूट ही रहा था दिल,आरज़ू थी प्यार की, सुनी तलक नहीं गई बात सोग़वार की, हसरतें लिए हुए,गए किसीके दर पे हम, गले मिलीं हमें वहां रंजिशें बहार की, फट गई थी ओढ़नी जो अश्क़ पोंछते हुए, उसने य...

भ्रम

सहारा, भ्रम ही तो है, मिल जाना किसीका, बहुत बार मिल जाना, और फिर फिर मिलना, साये की तरह बिछुड़न भी तो है ही, कहाँ भूले जाते हैं ? क्रम है, तलाश की शुरुआत, रफ़्तार जारी रखना, पर हवाएँ पी...

क्या बताएं

क्या बताएं,किस तरह हम संग उसके हैं जिए, जब हदों के पार जाकर तंज़ उसने हैं किये, बरसरे महफ़िल,तमाशा बन गए,ये भी हुआ, बे-सबब ही,ज़ह्र के सब रंग हमने हैं पिए, होगये हलकान,अपने आपसे,लड़कर ...

दफ़ा हो गए हैं

अदब अब सभी के दफ़ा हो गए हैं, बुज़ुर्गाने आला ख़फा हो गए है समेटे नहीं जा सके दिल के टुकड़े, ये हिस्से भी कितनी दफ़ा हो गए हैं, सिखाई मुहब्बत-ऑ-तहज़ीब जिनको, जवां क्या हुए,........बे-वफ़ा हो गए ...

फ़नकारी रखते हैं

जाने क्या-क्या करते हैं,क्यूँ पर्दादारी रखते हैं, अपने हर अंदाज़-ओ-अदा में,मीनाकारी रखते हैं, हमको कम क्यूं जाने दुनियां,हम भी हैं ज़र ख़ेज़ बहुत, जब से अपने दिल पर ग़म का पथ्थर भार...

बाध्य कर देती है

क्यूँ समझ,सब कुछ समझने को बाध्य कर देती है, परिस्थिति को और असाध्य कर देती है, जैसे खैर,खून,खांसी,ख़ुशी, कैसे भी नहीं छुपते, और समझ अपना काम करती है, जो स्पष्ट नहीं,उसे भी समझती है,...

दीवारों में

पुराने पन्नों से----- लफ़्ज़ लिखे और टांग दिए दीवारों में, अपनी गिनती रखी नहीं फनकारों में, ख़ुद पढ़ते हैं ख़ुद ही खुश हो जाते हैं, नाम हमारा छपा नहीं अख़बारों में, हमने अपने दर्द सुनाय...

खोके दिखा

जो भी तेरे पास है,खोके दिखा, उम्र भर मेरी तरहा रोके दिखा, ज़िन्दगी भर तल्ख़ियों को साथ रख, जान-ओ-दिल से खानुमां होके दिखा,

आदिल हो गए

हम अकेले कितने क़ाबिल हो गए !! इतने सारे ग़म जो हासिल हो गए !! वक़्त किसको था के देखें और सुनें, सब के सब आके,मुक़ाबिल हो गए, बा-अदब कुदरत ने भी की दुश्मनी, हादसे हर चन्द शामिल हो गए, सामने...

बहला रहे हो

जहां को किस तरह टहला रहे हो, ख़ुद अपने आप को बहला रहे हो, हरे ज़ख्मों का सौदा क्यों किया है, कलेजा ख़ुद ब ख़ुद सहला रहे हो, उर्मिला माधव

ज़माना देखा

नज़र घुमा के निशाना देखा, तो अपने आगे ज़माना देखा, छुपाईं आँखें हथेलियों से, यूं ज़िन्दगी का बहाना देखा, तमाम चमड़ी उधेड़ डाली, कहीं न ग़म का दहाना देखा, उर्मिला माधव 28.6.2018

अदावत की वाह वाह

चिलमन दरूं गिरा के किया आपने गुनाह, इस बे-अदब अदा का भला क्या करेंगे आह !!, इन फासलों के साथ ही चलना है गर हमें, किसकी करेंगे आरज़ू,किसकी तकेंगे राह, करने से पहले आपने सोचा तो होगा ख...

तस्वीरों की हैसियत

तस्वीरों की हैसियत ? कम नहीं होती, जानते हो ? ये इतिहास रखती हैं अपने अन्दर, तो चलो इतना बताओ, कैसे ये साबित करोगे? तुम कभी दो साल के थे, किस तरह दिखते थे तुम, आज कंप्यूटर की दुनिया...

नज़्म याद आती है

मुझे गुज़रे ज़माने की वो दुनिया याद आती है, कभी ज़ोरों से चिल्लाना, कभी बहना से लड़ जाना, कभी अम्मां से डर जाना, कभी बारिश से घबराना, कभी वो हंस के बल खाना, कभी रो रो के मर जाना, कभी इतन...

सरगम

हम तो भूले हुए थे उसका गम, जाने ये किसने छेड़ दी सरगम वो तरन्नुम सा याद आने लगा, जैसे फूलों पे गिर गई शबनम, जिसकी आवाज़ की खनक से कभी, मिटने लगते थे सभी दर्द-ओ-अलम, उसकी नादानियों क...

ईद...नज़्म

Ek nazm ..Eid ke waaste.. Baluji Shrivastava Eid tera khair maqdam kis tarah ho, Khoon ke dhabbe abhi dhoye nahin, Kynki tera pairahan shaffaq hai, Sab gharon men ud rahi ek raakh hai, Ranj men doobe hue chehre khade, Kuchh zamiN par rote-rote gir pade , Aansuon ka kaarwaaN kam kis tarah ho, Eid tera khair maqdam kis tarah ho, Aaj jo hota hai,wo socha nahin tha, Mulk o millat men koii locha nahin tha, Ye naii duniyaN ajab itni lage hai, Lafz kahne ko nahin,kitni lage hai, Mazara kya hai,samajh aataa nahin, Khauff bhi dil se magar,jaataa nahin, Khairiyat bhi poochhne ka dam nahin, Qatilon ke hausle,par kam nahin, Maut wala silsila,kam kis tarah ho, Eid tera khair maqdam,kus tarah ho, Dar se ghabraiI huii ye hirniyaaN sii, Jo sarapa lag rahin,aah-o-fughaN sii Khaas veeraani hai chere par rawaaN sii, Kaun jaane kab kahan, daaman jalaa de, Zindagi bhar ke liye, kaalikh lagaa de, Itnaa sara dar bhalaa kam kis tarah ho, Eid tera khair maqdam kis tarah ho, Eid tera ...

करते हो तुम

किस तसल्ली की दुआ करते हो तुम, ज़ख्म ही तो बस छुआ करते हो तुम, ख़ैर ख्वाहों में तो ....हरगिज़ हो नहीं, हो रहो ..जो कुछ हुआ करते हो तुम, इसको रब ने कीमती कर के दिया, ज़िन्दगी को बस जुआ करते हो ...

सवेरा हो गया

जाग जाओ अब सवेरा हो गया, बहुत लम्बा तेरा-मेरा हो गया, आकलन अपना स्वयं करते रहो, दूसरा क्यों कर चितेरा हो गया, हर कोई जीता है अपने रंग में, फिर कहाँ दुनिया का घेरा हो गया, उर्मिला ...

बड़ी हैं ?

अमां बदनामियाँ सर पे खड़ी हैं, भला क्या ख़ाहिशें इतनी बड़ी हैं? सिवा जाओ न हर्गिज़ दायरों के, के हर जा आंधियां पीछे पड़ी हैं, तुम्हारे ज़हन में इतना नहीं क्या? जहां की बंदिशें कितनी ...

इतनी दूर

आप मेरी नईं सुनें ये आपकी मर्ज़ी हुज़ूर, हम जो अपनी बात कहते हैं कहेंगे ही ज़रूर, नाव कागज़ की सही पर हौसला मजबूत है, चल दिये तो देख लेना पार उतरेंगे ज़रूर, मुद्दतों देखा किये ...

ताब रखते हैं

हम तखैय्युल की ताब रखते हैं, अपने दिल में ही ख़ाब रखते हैं, ज़ख्म-ए-उल्फ़त के सब सवालों का, हर मुक़म्मल जवाब रखते हैं, दिल कभी टूट कर न रोये कहीं, क़तरा-क़तरा हिसाब रखते हैं.. ज़ेरे लब मुस...

कई ग़ज़लें

रेख्ता में... क्या ख़बर तुझको,क्या हकीक़त है, ज़िन्दगी ......मौत की ही आहट है, यूँ मयस्सर हज़ार खुशियाँ हैं , पर कहीं इसमें कुछ मिलावट है, मिलने वाले हज़ार मिलते हैं, वो नहीं,जिसकी हमको चाह...

रोकती हूँ

बताऊँ क्या ज़माने ख़ुद को कितना रोकती हूँ मैं, भटकती हूँ,संभलती हूँ, मगर कुछ सीखती हूँ मैं, क़दम थकने लगे हों और खड़े रहना भी मुश्किल हो, कहीं मैं गिर न जाऊं ख़ुद को इतना थामती हूँ मै...

पड़ोसी लड़का

कितना जुदा लगा था, मेरा पड़ोसी लड़का, बातों में था सलीका, वो जाने,किससे सीखा, मिलने में दम नहीं था, पर फिर भी कम नहीं था, हर रंग जानता था, अपनी ही मानता था, राहों में आते जाते, उसको कभ...

रह जाएगा

jalte-jalte hi juda ho jaayega, or bas phir kya bacha rah jaayega ?

दुआ करते हो तुम

किस तसल्ली की दुआ करते हो तुम, ज़ख्म ही तो बस छुआ करते हो तुम, ख़ैर ख्वाहों में तो ....हरगिज़ हो नहीं, हो रहो ..जो कुछ हुआ करते हो तुम, इसको रब ने कीमती कर के दिया, ज़िन्दगी को बस जुआ करते हो ...

लिख गया

एक मतला एक शेर... तरही वक़्त आकर ज़िन्दगी की तर्जुमानी लिख गया, 'कोई आया मेरे दिल पै पानी-पानी लिख गया,' दो घड़ी के वास्ते बस .....राह का साथी बना, जाने क्या सोचा के सर पै मेहरबानी लिख गया..... ...

जी जनाब

मेरी फरेबी ज़ीस्त का उन्वान था सराब बाहर से ज़िल्द देख कर,मिलते रहे जवाब, हमने अज़ीम-ओ-शान से जी ज़िन्दगी ज़रूर, उम्मीद फिर भी सबको रही,बोलें जी जनाब, उर्मिला माधव .. 24.6.2017

कर सकते

ग़र जो अफ़साना हुआ ख़ून-ए-जिगर से रंगीं, इसको तब्दील यूँ नालों में नहीं कर सकते, जो जिगर चीर तो दे,उफ़ भी नहीं करने दे, उसका ज़िक्र चाहने वालों में नहीं कर सकते, चुटकियाँ लेके ग...

बारीकियां बाक़ी

तबीयत हट गई सबसे,नहीं दिलचस्पियां बाक़ी, बहुत समझीं मगर फिर भी रहीं बारीकियां बाक़ी, कभी किरदार मुश्किल था,कभी दिल पढ़ नहीं पाये, ब-ज़ाहिर रौशनी हर सू, मगर तारीकियां बाक़ी, हज़ारों ...

गंदी है

खड़े हो भीड़ में जाकर,तुम्हारी क्या बुलंदी है ? जो ये ख़ैमों की दुनियां है,हज़ारों ढंग से गन्दी है, यहाँ ख़ालिस मुलम्मेदार हैं,आक़ाओं के चेहरे, हिफाज़त इक बहाना है,असल ये नाक़ाबन्दी ह...

दरकिनार है

मेरी आरज़ू मेरा प्यार है मेरी आबरू मेरा प्यार है तेरा जिस्म दर किनार है तेरी रूह से मुझे प्यार है इसे इश्क़े मज़ाज़ी न समझो तुम ये हक़ीक़ी-ए-इश्के शुमार है................. उर्मिला माधव..

गुनाह कर बैठे

हाए ये क्या गुनाह कर बैठे? ख़ुद ही ख़ुद को तबाह कर बैठे, ज़ब्त से काम ले रहे थे हम, जाने क्यूँ आह आह कर बैठे, भूल कर भूल हो गई हमसे, तेरी चाहत की चाह कर बैठे, किस क़दर हमसे ये गुनाह हु...

कोयल गाती है--गीत

ज़ाहिर है के दुखी नहीं हो पाती है, हैरत है क्यूँ आँख नहीं रो पाती है !! बरस कभी जो जाती है ये आँख अगर, खुशियों के ही मोती ये बरसाती है, ज़मीं यहाँ की बहुत-बहुत उपजाऊ है, मगर ...जह्र के बीज...

पस्त है

मौत की तारीक़ियों से हौसला क्यूँ पस्त है, ज़िन्दगी के साथ ही इसका भी बंदोबस्त है, इक ज़रासे क़ह्र से बस चीथड़े उड़ जायेंगे, रंग ये कुदरत का है जो ज़ीस्त मैं पैवस्त है, अच्छे अच्छों को ...

चीखता क्यूं है

चमन में,फाख्ताएं,बुलबुलें,और खुशबुएँ भी हैं, वो आख़िर चाहता क्या है,हवा में चीख़ता क्यूँ है ?? मुहब्बत के हंसीं जलवे,शह्र के ख़ूब रु मंज़र, उसे सब कुछ मुहैया है,तो इतना झींकता क्यू...

नहीं लगता

कोई भी नाख़ुदा नहीं लगता, कुछ भी अच्छा,बुरा नहीं लगता, कोई रोए,हंसे,मिले, बिछड़े, ख़ास कुछ भी हुआ नहीं लगता, उर्मिला माधव

राग बहुत हैं

घर के ही खट राग बहुत हैं, बिन रंगों के फाग बहुत हैं, अपनी गुज़री दुनियां में भी, तरह-तरह की आग बहुत हैं, ये घर को मद्फन कर डालें, अब ज़हरीले नाग बहुत हैं, बस चलती हैं खालिस बातें, जिन ब...

लड़ी है

आई जो आँखों में आंसू की लड़ी है, कितने बरसों से मेरे पीछे पड़ी है, उम्र भर रौशन दिए आलों में रख्खे, रात काली बा-अदब दर पै खड़ी है, अपनी जानिब से हंसूं हूं बे-तहाशा, क्या कहूँ दुनियां ...

नहीं जी सकते

हम मुहब्बत के सराबों में नहीं जी सकते, सच ही कहते हैं, हबाबों में नहीं जी सकते आप आलिम हैं मुहब्बत के रहें,ख़ूब रहें, यार,खादिम हैं नवाबों में नहीं जी सकते, अपने जज़्बात भी चेहरे ...

एक झील

एक झील ठहरी सी,गहरी सी, झांक कर चेहरा न देखो, डूब जाओगे, तुमको तैरना नहीं आता, इसकी सतह बगुलों के लिए है, शुद्ध और उजले, निर्मल कोमल, स्थायित्व है इनमे, जगह निश्चित है इनकी, ये तुम...