ज़माना देखा

नज़र घुमा के निशाना देखा,
तो अपने आगे ज़माना देखा,

छुपाईं आँखें हथेलियों से,
यूं ज़िन्दगी का बहाना देखा,

तमाम चमड़ी उधेड़ डाली,
कहीं न ग़म का दहाना देखा,
उर्मिला माधव
28.6.2018

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