बहला रहे हो

जहां को किस तरह टहला रहे हो,
ख़ुद अपने आप को बहला रहे हो,

हरे ज़ख्मों का सौदा क्यों किया है,
कलेजा ख़ुद ब ख़ुद सहला रहे हो,
उर्मिला माधव

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