दरकिनार है

मेरी आरज़ू मेरा प्यार है
मेरी आबरू मेरा प्यार है
तेरा जिस्म दर किनार है
तेरी रूह से मुझे प्यार है
इसे इश्क़े मज़ाज़ी न समझो तुम
ये हक़ीक़ी-ए-इश्के शुमार है.................
उर्मिला माधव..

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