कई ग़ज़लें
रेख्ता में...
क्या ख़बर तुझको,क्या हकीक़त है,
ज़िन्दगी ......मौत की ही आहट है,
यूँ मयस्सर हज़ार खुशियाँ हैं ,
पर कहीं इसमें कुछ मिलावट है,
मिलने वाले हज़ार मिलते हैं,
वो नहीं,जिसकी हमको चाहत है,
राम कहले रहीम कह ले पर,
रोज़-ए-महशर असल इबादत है,
एक तमाशा है जिंदगानी भी
जिसकी खातिर अज़ीम शिद्दत है,
जो न पैदा अगर हुआ होता,
कौन कहता के चल बुलाहट है?
#उर्मिलामाधव..
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जाने किस-किस ने हमें ताकीद की,
क्यूँ नहीं देखी चमक खुर्शीद की ?
जबकि एहसास-ए-रक़ाबत होगया,
किससे तब उम्मीद हो ताईद की ?
सब चमक से ही अगर मंसूब था,
सबसे बेहतर थी चमक नाहीद की,
वक़्त-ए-मुश्किल हो गए महदूद हम,
दिल संभाला,और फ़क़त तौहीद की,
ख़ूबसूरत जिंदगी ..............नैरंग है,
हमने कब इससे कोई उम्मीद की ?
जब तगाफुल का इरादा कर लिया,
कौन करता फ़िक्र ख़ैर-ओ-दीद की ?
उर्मिला माधव...
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तेरा साथ उल्फ़त की शबनम रहेगा,
बशर्ते के ता-उम्र बाहम रहेगा ,
ख़ुसूसी मुहब्बत मिली ज़िन्दगी को,
तो यूँ मौत का फिर किसे ग़म रहेगा
तजुर्बों ने जो कुछ सिखाया है हमको,
वो हो चाहे जितना, मगर कम रहेगा,
ज़ुबां से उन्हें आफ़रीं हम कहेंगे,
जहाँ तक भी इस जिस्म में दम रहेगा,
नहीं फ़िक़्र हमको ज़माने की हरगिज़,
ज़माना हमेशा ही बरहम रहेगा,
दिल-ओ-जां है क़ुर्बान जिस पे हमेशा,
वो हमदम है और सिर्फ़ हमदम रहेगा,
उर्मिला माधव ....
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राह जो चलनी है इसमें खूबियाँ कोई नहीं,
रूह-ए-खुद को छोड़ के वक़्त-ए-गिरां कोई नहीं,
दह्र है जलता हुआ और पथ्थरों के आदमी
चिलचिलाती धूप है ऑ आशियाँ कोई नहीं,
और कितना आज़माना,जो हुआ वो खूब है,
तुम वही हो,हम वही राज़-ए-निहां कोई नहीं,
है नया कुछ भी नहीं क्यूं इस क़दर हैरां हुए,
साथ चलने को तुम्हारे,अय मियाँ कोई नहीं,
सामने मक़्तल हुआ लो फ़िक़्र से खारिज़ हुए
बस यही रस्ता है...जिसके दरमियाँ कोई नहीं.....
उर्मिला माधव,
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किस तरह भूलूं तेरे अलफ़ाज़ बेजा,क्या करूँ
वहशतें या हसरतें जो भी हैं लेजा, क्या करूँ ,
दिल हथेली पै रखा और साथ में इक ख़त दिया,
कुछ नहीं बाकी बचा है क्यों ये भेजा, क्या करूँ,
हर घड़ी हलकान रहना और न सोना रात भर,
और जो तनहाई दी थी,वो भी है जा, क्या करूँ,
कब तलक चल पाएगी ये एक तरफ़ा ज़्यादती,
मैं भी जानूँ हूँ तग़ाफ़ुल जा कहे जा, क्या करूँ,
मुझको सुनना ही नहीं है,तल्ख़ियों का फ़लसफ़ा,
उम्र भर तो मैंने तनहा ,ग़म सहेजा, क्या करूँ
#उर्मिलामाधव...
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ढूंढिए इस शह्र में अब किसको हासिल कौन है
और ज़रा बतलाइये किसके मुक़ाबिल कौन है
मैंने मीज़ानों से पूछा,ताक़ पर रख कर ज़मीर
अपनी इन बर्बादियों में और शामिल कौन है
खुद हवाले करके जिसने,कश्तियाँ तूफ़ान में
बादबां से जाके पूछा मेरा साहिल कौन है,
ये नसीमे ख़ारो ख़स किसने जलाया आग में
आबशारों ने ये सोचा ,इतना जाहिल कौन है,
बर्फ़ का सीना पिघल कर एक दरिया हो गया,
कौन ठहरा था यहाँ पर,इतना माइल कौन है,
Urmila Madhav....
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