बारीकियां बाक़ी

तबीयत हट गई सबसे,नहीं दिलचस्पियां बाक़ी,
बहुत समझीं मगर फिर भी रहीं बारीकियां बाक़ी,

कभी किरदार मुश्किल था,कभी दिल पढ़ नहीं पाये,
ब-ज़ाहिर रौशनी हर सू, मगर तारीकियां बाक़ी,

हज़ारों किस्म के जलवे,नुमायां रु-ब-रु हर पल,
मगर रब की सदारत में, रहीं,वीरानियाँ बाक़ी,

मक़ाम-ए-ज़िन्दगी आसां नहीं इतना भी,सुन लीजे,
हज़ारों मर गए फिर भी रहीं क़ुर्बानियाँ बाक़ी,

जमा खर्चे ज़बानी देख कर इंसां की फितरत के,
लगा हमको अभी तक हैं बहुत तरतीबियां बाक़ी,
#उर्मिलामाधव..
22.6.2015..

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