पस्त है
मौत की तारीक़ियों से हौसला क्यूँ पस्त है,
ज़िन्दगी के साथ ही इसका भी बंदोबस्त है,
इक ज़रासे क़ह्र से बस चीथड़े उड़ जायेंगे,
रंग ये कुदरत का है जो ज़ीस्त मैं पैवस्त है,
अच्छे अच्छों को यहाँ पर टूटते देखा गया,
जो नहीं समझा इसे वो बंदा ए बरगश्त है,
चढ़ गए मंसूर सूली पै,तिरी औक़ात क्या,
सबको आना होश है,जो बेखुदी में मस्त है,
#उर्मिलामाधव,
22.6.2015
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