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Showing posts from September, 2018

रख्खा गया

ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा बिलकुल जुदा रख्खा गया, आदमी का आदमी से सिलसिला रख्खा गया, ज़ीस्त में कुछ इस तरह रंगीनियाँ रख्खी गईं, जिसमें इंसानों को हरदम मुब्तिला रख्खा गया, बुत बनाया पथ...

बिखर के दुनियां

लाख़ आगे से गुज़र जाए,संवर के दुनियां, मेरी आँखों को नज़र आए बिखर के दुनियां, बस तमाशा ही हुआ करता है अब ज़ेरे नज़र, सूरत-ए-हाल कहूँ,डर जाए,सिहर के दुनियां, उर्मिला माधव

आना चाहिए

चूंकि हंसने को बहाना चाहिये किस तरह हँसना है आना चाहिये

स्पंदन हीन हो गया

मन स्पंदन हीन हो गया, जैसे आत्म विहीन होगया, आंसू हों या मुक्त हंसी पर, स्थित प्रज्ञ,ये दीन हो गया, ह्रदय प्रीत के मान दंड पर, पानी के बिच मीन हो गया, सत्य कहें तो प्रेम बिंदु पर, य...

स्मॉल नज़्म

पहले तुम भुलाये गए फिर तुम्हारी याद भुलाई गई फिर तुम्हारी हर बात भुलाई गई तब फिर बचा क्या ?????? बोलो।।।। #उर्मिलामाधव 30.9.2015

फ्री वर्स ---महदूद या मसदूद

दायरे, महदूद हों या मसदूद क्या फ़र्क़ है अगर दिल ही न चाहे बढ़ना सोच कहीं खुश्क हो गया तो क्या हो शबनम से बहुत होगा तो दरख़्तों की शाखें गीली होंगी पत्ते भीग जाएंगे फूल भीग जायें...

बचपन की दुनियां

बुरी हो या अच्छी,लड़कपन की दुनियां, बहोत याद आती है,बचपन की दुनियां, वो खड़िया से आँगन में ख़ाने बनाना, ऑ गिट्टी से उस पर निशाने लगाना, बस एक पाँव से ही मगर चलके जाना, कभी जीत जाना,कभ...

ढोलक की थाप

ढोलक की थाप, सोहर गाने की आवाज़, किन्नरों के  समूह का नृत्य, पर थाप से उठती हुई उदासी की परछाइयां, देख सकती हूं मैं,दूर तक, क्या है ये? हतप्रभ होता हुआ मन, ढोलक की आवाज़ में नीरवता क...

बदनाम सब

करने आए थे हमें बदनाम सब, कर नहीं पाए मगर ये काम सब, जो ये कहते थे खुदी को कर बुलंद, वो ही बैठे हैं जिगर को थाम सब, बेचने को आए हम भी ज़िन्दगी, कर गए साबित हमें बेदाम सब, अब सबीलों की दर...

परवाह बोलो

मैं किसीकी क्यूँ करूँ परवाह, बोलो, एक तरफ़ा कब निभी है चाह, बोलो, जानिब-ए-मंजिल मुझे जाना ही होगा, ज़िन्दगी भर क्यूँ तकूँ अब राह, बोलो, ज़िन्दगी को दर्द-ए-गम का वास्ता दूँ ? क्या वो आइ...

निशाने दो

एक ताबूत और सिरहाने दो, जैसे जी चाहे लेट जाने दो, इक सुपुर्द-ए-ज़मीं ही बाक़ी है, दफ़्न इक रस्म है, निभाने दो, मौत बस आख़री तमाशा है, इसको इज़्ज़त से रंग लाने दो, इसको मरके मिसाल होना है, ज़...

नदी के धारे

तुम ही हो मन मीत हमारे, याद करें हम सांझ सकारे, जंगल वृक्ष नदी के धारे, अर्थ हीन लगते हैं..सारे, है सौगंध...हमारी प्रियवर, सम्मुख आओ आज हमारे... उर्मिला माधव .. २८.९.२०१३

क़ाबिल हो गए

हम अकेले कितने क़ाबिल हो गए, इतने सारे ग़म जो हासिल हो गए, वक़्त किसको था के समझें और बस, सब के सब आके,मुक़ाबिल हो गए, बा-अदब कुदरत ने हमपै की इनायत, हादसे हर चन्द शामिल हो गए, लोग सब लश्...

ग़ज़ब था

उठाके उसने कमाने अबरू.....वो तीर साधा के बस ग़ज़ब था, जो दिल मुहब्बत में मुब्तिला था,संभलना होगा ये होश कब था, #उर्मिलामाधव... 18.5.2015

इल्ज़ाम थे

खून के रिश्ते जो मेरे नाम थे, ज़िन्दगी के वास्ते इल्ज़ाम थे, हक़ अदा करते रहे रुसवाई का, अश्क़ मेरे जा-ब-जा बदनाम थे, फासलों की बढ़ गयी रस्सा-कशी, जो तग़ाफ़ुल का लिए पैग़ाम थे, था मुहब्बत ...

सुभीता है

यूँ बोले वो राम क़सम दिल प्यार से हमने जीता है, झूठ पे चलने वालों को,ये कितना बड़ा सुभीता है, हाथ में ली तस्बीह..लिया हरि नाम हज़ारों रंगों में, शाम हुयी तो गम के आंसू.....मयखाने में पी...

अच्छा हुआ

इम्तिहाँ है ज़िन्दगी तो जो हुआ अच्छा हुआ, ये ही तो बेचारगी है,वक़्त कब किसका हुआ? टूटना दिल का हुआ मंज़ूर जब हर हाल में, रंज क्या करना भले झूठा हुआ सच्चा हुआ, ख्वाब हों,ख्वाहिश हो य...

बग़ावत नहीं रही

duniyaan se aaj koi shikayat nahin rahi, afsurdgi se dil ko....bagawat nahin rahi, milna ho ya bichhadna,sabhi eksa lage, hum pe masarrton ki inaayat nahin rahi, Urmila Madhav

दिए गए

ऐसा नहीं के हमको .....बता कर दिए गए, देना था कुछ सो ग़म ही अता कर दिए गए, बरसों से आंसुओं से जिन्हें लिख रहे थे हम, वो ख़त मुग़ालते में ख़ता कर दिए गए उर्मिला माधव 26.9.2018

फ्री वर्स

ये बताओ रूह कैसे बांटते हैं ? जिस्म के हिस्से हैं जितने, हर हिस्सों में एक रूह मिलेगी रूह का अलग हो जाना, क़यामत होता है और वो क़यामत रोज़ गुज़रती है, मेरे ऊपर,फिर कहाँ ज़िद,गुस्सा ,त...

दिल तोड़ा होगा

जब तूने दिल तोड़ा होगा, कैसे तुझको छोड़ा होगा, तनहाई में अक्सर जाकर, चौखट पै सर फोड़ा होगा, बाँयां हाथ जिगर पै रखकर, दिल का दर्द निचोड़ा होगा, चाहे जितना ग़म हो तुझको, मुझ से तो पर थोड़...

क़ीमत क्या है

उसके इनकार या इक़रार की क़ीमत क्या है, दिल से संजीदा नहीं,प्यार की क़ीमत क्या है, बिल शुबह झूठ के कुछ ख़ास कसीदे भेजे, ऐसे मतलब से बने यार की क़ीमत क्या है, जिसकी बुनियाद रखी, तुमने मह...

आख़री कोशिश

रहेगी आज़्म्तर से आज़्म्तर ये आखरी कोशिश, तुझे सुननी पड़ेगी बे-खबर ये आखरी कोशिश, कभी तो कुछ असर होगा मेरी खामोश आहों का, नज़र अंदाज़ होगी किस क़दर ये आखरी कोशिश, ज़रा दामन बढ़ा चश्म-ए-...

वार दी

आंसुओं के साथ मैने,ज़िंदग़ी गुज़ार दी, वक़्त की बला उतारी,सोज़े-ए-ग़म पै वार दी, बेबसी ऑ बेकसी में बेख़ुदी का आसरा, जब हुई ज़ियादती तो मग्ज़ से उतार दी.. किसलिए क़ुबूल हों दह्र तेरी नेमतें, ...

मंसूब हो जाएं

इबादत से अगरचे हम.....बहुत मंसूब होजाएं, तो लाज़िम है ज़माने की नज़र में खूब हो जाएं, किसी दिल में क़दम रखना भी कार-ए-पुख्ता कारा है, ज़रा नज़र-ए-इनायत हो......कि बस महबूब हो जाएं, हज़ारों जान स...

इधर आइये

:) एक मज़ाहिया ख़याल---- ------------------------------ कभी कभी ऐसा ख्याल भी... ज़ुल्फ़ कांधों पै बिखराइये, बाद उसके इधर आइये , मुझसे कहने लगे दीदावर, चांदनी रुख पै ठहराइए, मुझको कहना पड़ा देखिये, मेरे रस्ते से हट ...

दुआ करो

जो सुकून-ओ-चैन अता करे मेरे हक़ में ऐसी दुआ करो, जो तुम ही ने मुझको दिए हैं सब वही ज़ख़्म तुम न छुआ करो, जिसे इल्म ही न हुआ कभी किसी बन्दगी का चलन है क्या ? तुम्हें ख़ुद पै कितना ग़ुर...

कूजागर

इसके आगे कौन जाए और क्यूं हो यहीं पर फ़ैसला ऐ कूजागर पर्दादारी भी अजब इक खेल है, ढूंढते फिरते हैं होके,दर-ब-दर उर्मिला माधव

हवा हो गया क्या ?

मुहब्बत हुई तो बुरा हो गया क्या? जफ़ाओं से दिल आशना हो गया क्या ? बहोत जिसकी तुम पैरवी कर रहे थे, वो माशूक़ तुम से जुदा हो गया क्या ? ज़मीं पर कभी पाँव,रखते न थे तुम, वो अंदाज़ बिल्कुल ह...

रास्ता पूरा करें

आग ग़ैरों ने लगाई बोलो इसका क्या करें, हार कर बैठें के या फिर हौसला ज़िंदा करें, कोई भी इस ज़िन्दगी में साथ तो देता नहीं, ख़ुद-ब-ख़ुद उठ जाएँ ख़ुद ही रास्ता पूरा करें, ज़िन्दगी कुछ भी नह...

दोहरी शख़्सियत--- फ्री वर्स

दरकिनार नहीं की जा सकती, अपनी रूह की आवाज़, मुश्किल कर देती है जीना दोहरी शख्सियत के साथ, रूहें तजुर्बेकार होती हैं, सच समझने की ताकत बहुत शिद्दत से रखती हैं पहचान मजबूत होती ...

छाले देखना

जब कभी पिछले रिसाले देखना, हंसने वालों के भी छाले देखना, मुस्कुराहट पर फ़क़त जाना नहीं, हो सके तो आह-ओ-नाले देखना, महफ़िलों औ-क़ह्क़हों के शोर में, आंसुओं वाले......निवाले देखना, कुछ फ़स...

जंजाल देखो

जंगली, जंजाल देखो, मकड़ियों के, जाल देखो, आदमी का, हाल देखो, लड़कियों के नाम पर, रोज़ इक वबाल देखो, इज़्ज़तों पे क़ाबिज़ हैं, माईयों के लाल देखो, उफ़ अगर जो करनी है, गर्दनें हलाल देखो, हक़ जो ...

चाहते हैं

आग रख के बर्फ़ पे क्या हश्र देखा चाहते हैं, सब्र आख़िर किसलिए सब आज़माया चाहते हैं, अद्ल ख़ुद को मान कर ख़ुद फ़ैसला भी कर दिया लो, इसके मानी ये हुए सब  क़ह्ऱ बरपा चाहते हैं, इक जुबां बंद...

तीन ग़ज़ल

1 :: ये तो ज़ाहिर है,वो बिलकुल बे-वफ़ा है, क्या कहूँ दिल का अलहदा फ़लसफ़ा है, क्यूँ किसी इन्सान का शिकवा करूँ मैं, गम मेरी तक़दीर का अव्वल सफ्हा है, बारहा तन्हाइयां हैं,बारहा वीरां सफ़र ...

गुम हो गई

क्या कहूँ जुस्तजू को लिए सो गई, चांदनी उससे पहले ही गुम हो गई, यक़-ब-यक़ शोर काली घटा ने किया, गो कि परछाईं जाने कहाँ खो गई, गाहे-गाहे कड़कने लगीं बिजलियाँ, दिल धड़कने लगा ज़ोर से रो गई, ...

नज़्म आज़ाद

सामने हो भी और नहीं भी हो, ये जो घेरे तुम्हारी यादों के, किस तरह घेर कर खड़े हैं सब, इतने ज़िद्दी हैं घर नहीं जाते, नींद कहती है हम नहीं आते, रात है,तीरगी है,तन्हाई, और क्या-क्या लिखा ...

तो मैं जानूँ

डूबते सूरज की समझे नातवानी तो मैं जानूँ, और अपनी छोड़ दे ये हुक्मरानी तो मैं जानूँ बादशाहत के नशे में चल रहा है झूम कर तू, बिन नशे के जी ज़रा ये ज़िंदगानी तो मैं जानूँ, हो गए गद्दीन...

ज़िद

एक मुद्दत से .....मेरे पीछे पड़ा है, दर्द है के हर जगह आकर खड़ा है... रास्ते कुछ और भी हैं ...दुश्मनी के, ये बता तू किसलिए जिद पर अड़ा है? #उर्मिलामाधव... 16 .9.2015

रौशनी तो हो

मैं अपनी राह खुद चल लूँ,के इतनी रौशनी तो हो, हवा के साथ उड़ जाऊँ हवा में ज़िन्दगी तो हो, मिलाने हाथ आए हो, चलो,मंज़ूर भी कर लूँ , मगर दिल में तुम्हारे सादगी सी सादगी तो हो, उर्मिला माध...

नज़र आती है क्या ?

आपको आंखों की तुग़यानी नज़र आती है क्या ? बेवज्ह भी यूँ किसीकी आंख भर आती है क्या ? हम तो हैं अनजान ये सब आप ही बतलाइये आह की तह में ख़ुशी की हद भी दर आती है क्या ? मेरे सर की सरपरस्ती, स...

शायद...

फ़िर वो मिलने को आएगा शायद, कोई किस्सा सुनाएगा शायद, मुझसे बोला के ठहरो आता हूँ, क़त्ल ही करके जाएगा शायद, पहले तजवीज़ मौत की रख्खी, मर्सिया फ़िर सुनाएगा शायद, अब तआक़ुब में मारा फि...

संभाले जाएंगे

एक मतला दो शेर... ज़ख्म यूँ दिल के संभाले जायेंगे, कितने हैं गहरे खंगाले जायेंगे, चाहे जो हालात हों लेकिन सुनो, हर तरह से हल निकाले जायेंगे, ग़र ज़बां देदी तो बस देदी मियाँ, हम जुनूं...

हिंदी की गलियां एक दिन

ख़ूब है हिंदी की गलियों का ये फेरा, एक दिन, भित्तियों पर चित्र भी जा कर उकेरा, एक दिन, हर कोई आतुर हुआ इंदौर जाने के लिए देख लेंगे उस शहर का एक सवेरा, एक दिन, देश के व्यवसायी जो अंग्...

रुसवाई है

उसमें ग़र सुरख़ाब के पर ही लगे हैं,इससे क्या, अलविदा की उसने ही हमसे कसम उठवाई है... हर तरह खामोशियाँ लाज़िम हैं अपनी ज़ात को, अपना ग़म दिखलायेंगे तो इसमें अब रुसवाई है, उर्मिला माधव, 1...

आशनाई न थी

नसीर तुराबी की तर्ज़ पर--- बराए नाम था वो,उससे आशनाई न थी, ये बात हमने किसीको कभी बताई न थी, फ़रेब देके कई बार उसने देख लिया, मगर ये ज़ीस्त ज़रा सी भी डगमगाई न थी, जब उसके दिल ने कहा उसने फ...

इल्म-ओ-ख़िताब वाले

रुतबा दिखा रहे हैं,इल्म-ओ-ख़िताब वाले, हैरत में पड़ गए हैं,इज़्ज़त-ओ-आब वाले, कितनी मुख़ालफ़त है, आए हुजूम लेकर, आंखें मिला रहे हैं, ईमान-ओ- ख़ाब वाले, जज़्बात मांगती है, हर्फ़-ओ-अदब की दुनि...