बदनाम सब

करने आए थे हमें बदनाम सब,
कर नहीं पाए मगर ये काम सब,

जो ये कहते थे खुदी को कर बुलंद,
वो ही बैठे हैं जिगर को थाम सब,

बेचने को आए हम भी ज़िन्दगी,
कर गए साबित हमें बेदाम सब,

अब सबीलों की दरारें बढ़ गयीं हैं,
घर भी करने आगये नीलाम सब,

मेरी किस्मत का तमाशा क्या रहा,
देखने को आ गए.....अंजाम सब....
उर्मिला माधव...
२९.९.२०१३

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