रुसवाई है

उसमें ग़र सुरख़ाब के पर ही लगे हैं,इससे क्या,
अलविदा की उसने ही हमसे कसम उठवाई है...

हर तरह खामोशियाँ लाज़िम हैं अपनी ज़ात को,
अपना ग़म दिखलायेंगे तो इसमें अब रुसवाई है,
उर्मिला माधव,
14.9.2015

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