दोहरी शख़्सियत--- फ्री वर्स

दरकिनार नहीं की जा सकती,
अपनी रूह की आवाज़,
मुश्किल कर देती है
जीना दोहरी शख्सियत के साथ,
रूहें तजुर्बेकार होती हैं,
सच समझने की ताकत
बहुत शिद्दत से रखती हैं
पहचान मजबूत होती है,
इनकी
आपकी अपनी रूह,
मेरी अपनी रूह
ज़माने की सच तस्वीरें दिखाती हैं
भूल जाते हैं हम इनके मजबूत
किरदार को,
और तब मुक़ाबिल होते हैं
फरेबों से,मानना ही नहीं चाहते,
देख कर भी आँख मूंदना
ठीक लगता है
पल भर की ख़ुशी के लिए
जो नहीं मिलनी है
फरेब के तह्त
कितना हिसाब रखना
पर क्या ये सही फैसला है ?
सोच कर बताना ...
#उर्मिलामाधव
20.9.2015

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