क़ाबिल हो गए
हम अकेले कितने क़ाबिल हो गए,
इतने सारे ग़म जो हासिल हो गए,
वक़्त किसको था के समझें और बस,
सब के सब आके,मुक़ाबिल हो गए,
बा-अदब कुदरत ने हमपै की इनायत,
हादसे हर चन्द शामिल हो गए,
लोग सब लश्कर में आये सामने जब
हर तरह से हम ही बातिल हो गए,
बोलना हमने कभी जाना नहीं,
खुद-ब-खुद ही अपने क़ातिल हो गए,
जो कभी शामिल न थे मुश्किल में भी,
बस दुआ देकर वो आदिल हो गए,
उर्मिला माधव...
27.9.2014...
Comments
Post a Comment