बिखर के दुनियां

लाख़ आगे से गुज़र जाए,संवर के दुनियां,
मेरी आँखों को नज़र आए बिखर के दुनियां,

बस तमाशा ही हुआ करता है अब ज़ेरे नज़र,
सूरत-ए-हाल कहूँ,डर जाए,सिहर के दुनियां,
उर्मिला माधव

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