अच्छा हुआ
इम्तिहाँ है ज़िन्दगी तो जो हुआ अच्छा हुआ,
ये ही तो बेचारगी है,वक़्त कब किसका हुआ?
टूटना दिल का हुआ मंज़ूर जब हर हाल में,
रंज क्या करना भले झूठा हुआ सच्चा हुआ,
ख्वाब हों,ख्वाहिश हो या फिर कोई दीगर बात हो
दिल मगर ज़िद्दी ही ठहरा,क्योंकि ये बच्चा हुआ,
उर्मिला माधव...
26.9.2015
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