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Showing posts from March, 2018

सितारे टांक दूँ

कुछ सितारे टांक दूं क्या आसमां में ? या कहीं चस्पां करूँ हुस्न-ए-जवां में ? ग़र कोई ख़ुशबू सुंघाई दे कहीं तो, प्यार की दुनिया लुटा दूं क्या जहां में ? खूबरू हैं सैकड़ों चेहरे ज़मीं प...

गीत बांसुरी

पुराने पन्नों से---- ------------------ बाँसुरी तुमको बनाना चाहती हूँ, अपने होठों से लगाना चाहती हूँ, और कोई गीत चाहे गा न पाऊँ, सिर्फ तुमको गुनगुनाना चाहती हूँ, सपने जो भी मेरी आँखों ने सजाए, व...

एक शब्द सुगंध

शब्दों का अप्रतिम सौन्दर्य, क्या लिखा है, प्रिय, तुम्हारी उँगलियों ने, एक शब्द, सुगंध, अनुपम है, आभासित है किन्तु, परिलक्षित नहीं, ये कोई प्रीत है क्या ? यदि हाँ, तो उजागर हो, अन्...

तुमने क्या किया

तुमको पसंद हमने किया तुमने क्या किया?? दिल को बुलंद हमने किया तुमने क्या किया?? तनहाइयों में रोया किये.......ज़ार-ज़ार खूब, दिल दर्द मंद हमने किया तुमने क्या किया?? तुमने तवज्जो हम पे ...

गीत अधूरा लगता है

सखियाँ कहतीं,साजन के बिन प्यार अधूरा लगता है, अम्मां कहतीं काजल बिन....सिंगार अधूरा लगता है, चाहे जितनी बिजली चमके,घर की सभी मुंडेरों पर, बारिश के बिन बादल का...हर वार अधूरा लगता ...

ज़िन्दगी

भीड़ में चलते हुए तनहा रही है ज़िन्दगी, क्या बताएं कब कहाँ,क्या क्या रही है ज़िन्दगी, जाने कितनी मुश्किलों से,रु-ब-होते रहे, थक गए हैं अब क़दम,घबरा रही है ज़िन्दगी, एक मिटटी का दिया त...

नज़्म--मैली औरत

कितनी हैरत से हमने देखा था, चूँकि एक जाल उसने फेंका था, साथ मैली सी एक औरत थी, उसकी हरगिज़ न कोई शोहरत थी, फिर भी उसको गले लगाया था, सब को अंदाज़ ये न भाया था, उसके पुरखों का एक बंगला थ...

सखावत आपकी

उम्र भर को चाहता है,दिल सखावत आपकी ख़ास जो दरक़ार है वो बस इजाज़त आपकी, दिल बहुत मजबूत है पर इस तरह हरगिज़ नहीं, सर पै चढ़ कर बोलती है,जब अदावत आपकी, आप कब समझे कभी ये इश्क़ की बारीकियां,...

क्या करते हैं हम

एक मतला दो शेर--- -------------------- बे-वज्ह इस जीस्त पे मरके भी क्या करते हैं हम, मरके जीने के इलावा.......और क्या करते हैं हम ?? चश्म-ए-गिरियाँ,टूटते दिल,और फ़क़त,तन्हाइयां, दर्द पीने के इलावा..........और क्या ...

किरदार की सफ़ेदी है

ये तो क़िरदार की सफेदी है, इसको एक उम्र मैंने देदी है , गोकि हर सम्त ख़ून रिसता है, ज़िंदगी इस तरह से छेदी है, तह में चिंगारी कुछ सुलगती सी, बुझने वाली थी,.. फिर कुरेदी है, #उर्मिलामाधव .....

चाहती है

मुझपे बस काबिज़ हुआ ही चाहती है, एक शै जो सिलसिला ही चाहती है, मैं खरी उतरूं अबस ,उम्मीद पर, वो मेरा हरदम बुरा ही चाहती है, मैं कड़े फिकरों से गुजरूँ,रात दिन, अपने हक में बस दुआ ही चा...

क्यों मरो हो

पारसाई की नुमाईश क्यों करो हो ? ख़ामियाँ ख़ासी नहीं तो क्यों डरो हो ? वो मुसलसल पीठ दिखलाता रहा है, ग़ैर की चाहत में नाहक़ क्यों मरो हो , उर्मिला माधव 24.3.2017

मरो हो

पारसाई की नुमाईश क्यों करो हो ? ख़ामियाँ ख़ासी नहीं तो क्यों डरो हो ? वो मुसलसल पीठ दिखलाता रहा है, ग़ैर की चाहत में नाहक़ क्यों मरो हो ? #उर्मिलामाधव.... 24.3.2015

फ्री वर्स

समेटना, बिखरी हुई पत्तियों का, सरल नहीं, तोडना, टूटी हुयी टहनियों का, है सरल, पर आवाज़ का क्या करोगे? जो तोड़ने से हुई, पर हाँ, किसीके टूटने-जुड़ने से, कोई आहत नहीं होता, ये निजता की ब...

चलते रहे

साथ मेरे तुम ही तुम चलते रहे, ख़ाब बन कर आँख में पलते रहे, नींद में झपकाईं पलकें जो कभी, हाँ ये सच है,आँख तुम मलते रहे, है मुझे हैरत रहे तुम बे-वफ़ा !! और अदू के साथ भी चलते रहे! क्या सुक...

एक मतला दो शेर

एक मतला --दो शेर... --------------------------- जिन दरख्तों की जड़ें,गहरी रही हैं, आँधियों के बाद भी....ठहरी रही हैं, शोर करतीं बिजलियाँ हैं जो उफ़क पर, ख़ुद शजर के साए में बहरी रही हैं, सब्ज़ दुनियाँ में ठुमक जा...

ईमान तो देख

घर कितना वीरान तो देख, क्या-क्या है,सामान तो देख, क्या पैमाना सही ग़लत का, अय दुनियां मीज़ान तो देख, जिस पर बोझा लाद रहा है, उसकी पहले जान तो देख, लिए आईना फिरता है तो, ख़ुद अपना ईमान त...

नापा करते हैं

उल्टे सीधे राग अलापा करते हैं, हम अपनी तन्हाई नापा करते हैं दबी-दबी एक बर्फ लबों पे जमी हुई, लोग तबस्सुम देखके स्यापा करते हैं, #उर्मिलामाधव... 22.3.2015

देख के बता

एक मतला दो शेर.... क्या-क्या निहां है मुझमें ज़रा देखके बता, वक़्त-ए-गिराँ है मुझमें ,ज़रा देख के बता पैवंद से ढके हैं,बहुत ज़ख़्म और सुराग, अब भी निशाँ है मुझमें ज़रा देख के बता, उर्मिला ...

अजनबी हो तुम

कैसे शिनाख़्त हो के वही आदमी हो तुम, मैं जानती कहाँ हूँ तुम्हें,अजनबी हो तुम,

गुज़र की है

maine aahon se guzar kii hai zamaane men bahut, phir bhi uljhan hai mujhe, dard bataane men bahut, maine har chand hatheli se dhaka palkon ko, dil bhi halkaan hua,ashq chhupaane men bahut,

उभर कर आ गईं

जब हमारी खूबियां बढ़कर हुनर पर आ गईं, रंजिशें सारे ज़माने की .....उभर कर आ गईं, झूठ में माहिर थे जितने,तह तलक,घबरा गए, बात कहने की अदाएं, बन संवर कर आ गईं, उर्मिला माधव, 21.3.2017

अंधेरे-उजाले

इन आँखों ने देखे अंधेरे-उजाले, मुझे अब सभी रंग लगते हैं काले, भले चांदनी नूर छलकाए अपना, दिए रु-ब-रु चाहे जितने जला ले, नहीं रंग दूजा कोई अब समझना, मिरी आंख तू चारागर को दिखा ले, ज़...

फ्री वर्स

आँधियों के वेग से प्रताड़ित होकर, वृक्ष अपनी डालियाँ कब बांधते हैं, कब स्वयं चिंतित हुआ है, पत्तियों का टूटना देखा है जिसने, फिर हरी कोंपल पनपती हैं वहीँ पर, धैर्य और ममता सतत ...

लड़खड़ाते रह गए

क्या किया जाता अगर ये दिल संभल पाया नहीं, रूह पर लिख्खा हुआ कुछ भी बदल पाया नहीं, टूट कर बस जिस्म-ओ-जां,लडखडाते रह गए, उसपे फिर ये दर्द -ए-दिल बाहर निकल पाया नहीं, Urmila MadhavMadhav 20.3.2016

तरक़ीब निकालो

जो चाहो तरकीब निकालो, किसी तरह दिल को बहला लो, अगर कोई कन्या मिल जाए, उसको बातों से फुसला लो, भले शेर चाहे जिसका हो, अपने नाम से उसको डालो, फिर देखो तुम रंग इश्क़ का, जिसको चाहो उसे ...

बीमार कर गए

उफ़ ज़िन्दगी के मरहले बीमार कर गए, ऐसा लगा कि ग़म का परस्तार कर गए  दामन में सिर्फ खार हैं.....पैरों में आबले, रस्ता बहुत कठिन था मगर पार कर गए , कुछ आरज़ू थी...कुछ थे इरादे बहुत बड़े , कुछ रा...

मरते ही बने

ज़ीस्त की बुनियाद ऐसी है कि मरते ही बने, इसको जितना ही समेटो ये बिखरते ही बने, अनगिनत रानाइयाँ हैं किसको देखेंगे भला, सूरत-ए-हालात ये कि ...सिर्फ़ डरते ही बने... उर्मिला माधव.. 11.3.2017

चर्चा ज़ुबाँ तलक

लाते नहीं हैं क़ुफ्र का चर्चा ज़ुबां तलक, मिलता नहीं था यार के दिल का निशां तलक, जज़्ब-ए-जुनूं में पूछते फिरते थे हाल हम, था होश तक नहीं,है मेरी हद कहाँ तलक, वहशत थी चश्म-ए-नम थी,दिल-ए-...

मर जाओगे

बे-वज्ह जिस्म पे....कितना इतराओगे, इतनी खुद्दारी लेकर....किधर जाओगे, जिस्म किसका हुआ...इस जहां में कहो, हम भी मर जायेंगे,तुम भी मर जाओगे, एक रक्क़ासा बोली ये..........गिरते हुए, इब्न-ए-मरियम न...

सिकंदर है तू

तू है बन्दानवाज़ बन्दापरवर है तू, बात रखले मेरी पास-ए-मंज़र है तू, मेरी राहों को थोड़ा तो आसान कर, मैं हूँ मुश्किलज़दा, नईं सितमग़र है तू, चश्म-ए-गिरियां,गुज़ारिश में पैवस्त है...

बरी हुई थी

दिलों में नफ़रत भरी हुई थी, मैं दुश्मनों से घिरी हुई थी, यही समझने में दिन गए सब, के चोट फिर से हरी हुई थी, जिसे ख़ुशी हम समझ रहे थे, वो जाने कब की मरी हुई थी, नहीं असीरी,मुझे मुआफ़िक, मै...

झांका करें हैं

खूब कारोबार लफ़्ज़ों का करें हैं, दूसरों के घर में,जो झाँका करें हैं तीलियां रख्खें हैं मुठ्ठी मैं दबाकर, राख़ में चिंगारियां झोंका करें हैं, कांच की दीवार वाले घर जिन्हों के, व...

मेहनत है

ज़ब्त करना भी एक मशक्क़त है, वास्ते दिल के अजीब मेहनत है, जाने किससे किधर ये टकराये, आँख उठना भी एक क़यामत है, जो भी ठुकराए उसपै मर जाए, दिल की बेजा हक़ीर हरक़त है, उर्मिला माधव... 17.3.2014

तनहा रही है ज़िन्दगी

भीड़ में चलते हुए तनहा रही है ज़िन्दगी, क्या बताएं कब कहाँ,क्या क्या रही है ज़िन्दगी, जाने कितनी मुश्किलों से,रु-ब-होते रहे, थक गए हैं अब क़दम,घबरा रही है ज़िन्दगी, एक मिटटी का दिया त...

सच कसम से

हमको लगता है कि तुम एक चाँद हो, चाँद ही तो दूर रहता है सनम से सच, कसम से, चांदनी आती है मेरे घर के दर तक, तुम कहीं आजाओ तो मर जाएँ धम से सच, कसम से, शर्म की पाजेब पांवों में है मेरे हो स...

ईद है

एक मतला एक शेर--- अय मियाँ,पागल हो ? या फिर ईद है ? दुश्मनों से क्यूँ .......तुम्हें उम्मीद है ? तुमने खुशियों में भी की है ताज़ियत, गलतियाँ समझो तुम्हें......ताक़ीद है.... उर्मिला माधव... 4.7.2016 .. ताज़िय...

आगरा का ताजमहल

आगरे का ताजमहल और मैं बेटी वहां की, और गली कूचे वहां के, कुछ हसीं मंज़र वहां के, दौड़ कर मथुरा कभी तो दौड़ के लखनऊ कभी हाथ में कुछ रेवड़ी, जो ख़ास लखनऊ में बनी हाथ में कंचे लिए बचपन की व...

नज़्म हो जाए तो मुश्किल

समझ आया तो येआया, मुहब्बत एक मुश्किल है नहीं होजाए तो मुश्किल, कहीं होजाए तो मुश्किल, निकल तो आये हैं घर से, कि हम करलें..मुलाकातें, नहीं हो जाए तो मुश्किल, कहीं हो जाए तो मुश्कि...