देख के बता
एक मतला दो शेर....
क्या-क्या निहां है मुझमें ज़रा देखके बता,
वक़्त-ए-गिराँ है मुझमें ,ज़रा देख के बता
पैवंद से ढके हैं,बहुत ज़ख़्म और सुराग,
अब भी निशाँ है मुझमें ज़रा देख के बता,
उर्मिला माधव,
21.3.2016
एक मतला दो शेर....
क्या-क्या निहां है मुझमें ज़रा देखके बता,
वक़्त-ए-गिराँ है मुझमें ,ज़रा देख के बता
पैवंद से ढके हैं,बहुत ज़ख़्म और सुराग,
अब भी निशाँ है मुझमें ज़रा देख के बता,
उर्मिला माधव,
21.3.2016
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