फ्री वर्स
आँधियों के वेग से प्रताड़ित होकर,
वृक्ष अपनी डालियाँ कब बांधते हैं,
कब स्वयं चिंतित हुआ है,
पत्तियों का टूटना देखा है जिसने,
फिर हरी कोंपल पनपती हैं वहीँ पर,
धैर्य और ममता सतत हों संगिनी जब,
#उर्मिलामाधव...
20.3.2015...
आँधियों के वेग से प्रताड़ित होकर,
वृक्ष अपनी डालियाँ कब बांधते हैं,
कब स्वयं चिंतित हुआ है,
पत्तियों का टूटना देखा है जिसने,
फिर हरी कोंपल पनपती हैं वहीँ पर,
धैर्य और ममता सतत हों संगिनी जब,
#उर्मिलामाधव...
20.3.2015...
Comments
Post a Comment