अंधेरे-उजाले
इन आँखों ने देखे अंधेरे-उजाले,
मुझे अब सभी रंग लगते हैं काले,
भले चांदनी नूर छलकाए अपना,
दिए रु-ब-रु चाहे जितने जला ले,
नहीं रंग दूजा कोई अब समझना,
मिरी आंख तू चारागर को दिखा ले,
ज़माने को देदी खुली जब इजाज़त,
चला ले कोई तीर तू भी चला ले,
तो अब मैंने रब से भी ये कह दिया है,
के तू भी चला जा, न मेरी बला ले,
उर्मिला माधव
21.3.2018
Comments
Post a Comment