गीत अधूरा लगता है
सखियाँ कहतीं,साजन के बिन प्यार अधूरा लगता है,
अम्मां कहतीं काजल बिन....सिंगार अधूरा लगता है,
चाहे जितनी बिजली चमके,घर की सभी मुंडेरों पर,
बारिश के बिन बादल का...हर वार अधूरा लगता है,
हीरे मोती जड़े रहें और धार भी हो.....तलवारों पर,
युद्ध वीर के हाथों बिन...हथियार अधूरा लगता है,
भारी भरकम दरवाजों पर.......सजी हुई मेहराबें हैं,
बेटी की बारात बिना......हर द्वार अधूरा लगता है,
सदियों से कुछ नाम लिखे हैं जगह-जगह दीवारों पर,
सत्य सनातन,शिव के बिन विस्तार अधूरा लगता है,
उर्मिला माधव...
30.3.2014...
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