उभर कर आ गईं

जब हमारी खूबियां बढ़कर हुनर पर आ गईं,
रंजिशें सारे ज़माने की .....उभर कर आ गईं,

झूठ में माहिर थे जितने,तह तलक,घबरा गए,
बात कहने की अदाएं, बन संवर कर आ गईं,
उर्मिला माधव,
21.3.2017

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