आजकल के लोग कुछ ज़्यादः सयाने हो गये, साल बेशक हो नया पर हम पुराने हो गए रौशनी बारूद की है,चार सू रंग-ए-क़फ़न, आदमी की ज़िन्दगी में कितने ख़ाने हो गए, इक बिखर जाता है,खींचें,ग़र सिरा हम द...
अपनी- अपनी कह गए सब मेरे मन में कुछ न था अब कोई लेता भी क्या जब अंजुमन में कुछ न था, सब की सब शादाब बेलें,सूख कर ,झडती रहीं, हर शजर ख़ाली हुआ ऑ बस चमन में कुछ न था, तेरी बीनाई को ये क्या ह...
मुहब्बत नहीं,दुश्मनी भी नहीं है, बहुत इन्तिहाई ठनी भी नहीं है, मगर ये भी सच है कि उनसे हमारी, कोई ख़ास अक्सर,बनी भी नहीं है, जहाँ भी मिले बस दरूं था तक़ल्लुफ़, कि जज़्बों में वो सनसनी ...
खून के रिश्ते जो मेरे नाम थे, ज़िन्दगी के वास्ते इल्ज़ाम थे, हक़ अदा करते रहे रुसवाई का, अश्क़ मेरे जा-ब-जा बदनाम थे, फासलों की बढ़ गयी रस्सा-कशी, जो तग़ाफ़ुल का लिए पैग़ाम थे, था मुहब्बत ...
किस्सा सुना रहे हैं ये वक़्त-ए-शाम किसका, इस गुफ़्तगू में आख़िर उट्ठा है नाम किसका, नामा निगार बनके आया है आज क़ासिद, लाया है देखो ख़त में,किसको सलाम किसका, नीलाम हो रहे हैं जज़्बात ह...
जब हुस्न का आलम था,ज़ुल्फ़ों में पेच-ओ-ख़म था, दिल कूचा-ए- जानम था,सर पे न कोई ग़म था, क़दमों तले जहाँ था,बाँहों में आसमां था, परवाज़ बे-अलम थी,मेरे साथ एक सनम था, क्या दास्ताँ सुना...
एक प्रयास हिंदी में, ------------------- मन हुआ अनमना तो,भजन कर लिया, लेके गंगा का जल आचमन कर लिया, बैठे आसन पे भी पालथी मार कर, जग के हर देवता को नमन कर लिया, जाने कितनी तरह से किया कीर्तन, अपने हा...
ये अदावत चल रही भगवान से.....ईमान से, लेना-देना कुछ नहीं इनसान से ....ईमान से, हाँ क़दम बोसी नहीं करते किसीकी भी कभी, ज़िन्दगी हमने गुजारी शान से ....ईमान से, जाने क्या-क्या रंग दिखलाए ज़मान...
Mujh pe bas qabiz hua hi chahti hai, ek shai ab silsila hii chahti hai, main khari utrun abas ummid par, wo mera hardam bura hi chahti hai, main kade fikron se guzrun,raat din, apne haq main bas duaa hii chahti hai, main guzarti hun,hazaaron tanz se, zakhhm dil ka wo chhua hi chahti hai, maine bhi baazi rakhi us ziist par, khelna jo bas juaa hii chahti hai... #उर्मिलामाधव... 27.12.2015
दुनियाँ से कुछ मिला भी नहीं...आपकी क़सम, और हमको कुछ गिला भी नहीं,आपकी क़सम, हम उम्र भर निभाया किये...मुश्किलों के साथ, और इसका कुछ सिला भी नहीं,आपकी क़सम, किस दरज़ा हम जगाते रहे.....कम नसी...
ये मेरी हस्ती है और मैं हूँ जनाब, आपके कहने से होगी क्यूँ ख़राब, देख कर ऐब-ओ-हुनर इनसान के, क्या बजाते फिरते हो ये मुंह जनाब, मैं भी ग़र कहने पे जो आ जाऊं तो, आप क्या दे पायेंगे मुझको ...
अभी तक तेरे सर पे शामत नहीं है, क्या ये ज़िन्दगी की निजामत नहीं है?? मुहब्बत किसीसे अगर हो ही जाए , वो बस हादसा है नियामत नहीं है , जो दिल आगया ग़र तुम्हारा किसीपे , तो फिर एक दिन भी सल...
उसी जुस्तजू में जिए जा रहे हैं, जो कह कर गए थे के ले जा रहे हैं, हमीं ने तो इज्ज़त भी बख्शी थी उनको, वही वार हम पर किये जा रहे हैं, कभी कितने ख़ुश थे,मगर आज बोले, ज़ह्र ज़ीस्त है और पिए जा र...
क्यूँ दिखाता है भला इतनी अदा ये ?? कौनसी दुनियाँ मैं रहता है खुदा ये ?? कोई मरता है तो मरता जा रहा है, चाहे जितना मौत से घबरा रहा है, अहमियत अपनी महज दिखला रहा है, दिल जिगर पे चोट करत...
ज़िन्दगी धुंआ-धुंआ, आदमी धुंआ-धुंआ, ज़िन्दगी की राह में, हर ख़ुशी धुंआ-धुंआ..... जो नज़ारे जल्वागर हैं, उनमें कुछ मज़ा नहीं, बेसबब समझ रहा है, ज़िन्दगी सज़ा नहीं, बेकसी की राह में, सादगी धु...
khwahishon ke rang main doobe huye, jii rahe hain log sab oonghe huye, ab kahan ho,kaise ho,kya haal hai, biit jaayen sadiyan bin poochhe huye, mahfilon main baithte to hain zaroor, muskuraate hoth,dil roothe huye, waah-waah kya baat hai,kya sher hai, daad haazir,lab magar,sookhe huye, aajkal ye hii masheenii taur hai, muskuraaye,chal diye,rookhe huye, #उर्मिलामाधव... 22.12.2015
यादें, कभी सुनहरी नहीं हो सकतीं, हम याद करते हैं उनको,जो, ज़िन्दगी की राहों में बिछुड़ गए, लौटेंगे नहीं दोबारा,हरगिज़, वो पल सुनहरे कैसे हो सकते हैं !! याद आते हैं वो, जो बहुत दूर हैं, ...
हादसे सुब्ह-ओ-शाम होते हैं, रोज़.....रिश्ते तमाम होते हैं, अपने अखलाक़ पे,नज़र ही नहीं, दाग़........लोगों के नाम होते हैं, जो भी चाहा जुबां से कह डाला, और तब क़त्ल-ए-आम होते हैं, ये जो मजमा लगाया ...
सख़्त दिल को कूट कर कच्चा किया, बोझ दिल का कम अज कम हल्का किया, चाह कर भी रो नहीं पाते थे हम, चश्म-ए-गिरयां के लिए रस्ता किया, एक ये एहसान भी कुछ कम नहीं, हर क़दम पर ग़म मेरा रुसवा किया, द...
तू मुहब्बत से हमें महरूम कर जो जाएगा, खूब तनहा रोयेगा,और बे-वफ़ा कहलायेगा, इतने सारे बेबसी के दाग दिल पे होंगे तब, आंसुओं से धोते-धोते,आप ही थक जाएगा, गुफ्तगू के हर्फ जब-जब याद तु...
दश्त जब हो ही गया मेरा कलेजा क्या करूँ, वहशतें या हसरतें जो भी हैं लेजा, क्या करूँ , दिल हथेली पै रखा और साथ में इक ख़त दिया, कुछ नहीं बाकी बचा है क्यों ये भेजा, क्या करूँ, हर घड़ी हलक...
दश्त जब हो ही गया मेरा कलेजा क्या करूँ, उम्र भर तो मैंने तनहा ,ग़म सहेजा, क्या करूँ, Dasht jab ho hi gayaa mera kaleja,kya karun, Umr bhar to maine,tanha,gam saheja, kya karun, दिल हथेली पै रखा और साथ में इक ख़त दिया, कुछ नहीं बाकी बचा है क्यों ये भेजा, क्या क...
कड़े फिकरे कोई कह कर, चला जाता था जो अक्सर, तग़ाफ़ुल उसकी नज़रों में, कभी देखा था जो मैंने, वो मुझको याद आता है।। ज़मीं जब ज़ख़्म धोती थी, फ़लक़ रह-रह के रोता था , कहीं तन्हाई में जाकर, कोई दा...
वक़्त आया,ज़िंदगी की तर्जुमानी लिख गया, कोई आया मेरे दिल पे पानी-पानी लिख गया, उम्र भर हम ..इक समंदर थाम कर चलते रहे, दुश्मन-ए-जां आंसुओं की एक रवानी लिख गया.. उर्मिला माधव.. 14.12.2016
उम्र भर जिसकी हिफाज़त दिल ने की, ख़ार की मानिंद .......क्यों चुभता रहा !!!!! दिल हमारा बे-अदब था .....क्या कहें, बे-वफ़ा की सम्त ही ......झुकता रहा.. उर्मिला माधव.... 13.12.2014....
हर दिल में ख्वाहिश है बाक़ी,रोटी,कपडा और मकान, चलो लगाएं नारा मिलकर,वाह-वाह अपना हिंदुस्तान, दाल-वाल क्या करेंगे खाकर,पांच सितारा होटल है क्या, सूखी रोटी खाकर बोलो,वाह-वाह अपन...
एक मतला ---2 शेर.. आँखों में जागता है,रातें उधार लेकर, सहरा को नापता है,आँखें उधार लेकर, दस्तार में छुपी है,शायद वो अक़्ल होगी, दुनियां को आंकता है,बातें उधार लेकर, खोया हुआ है इंसां, ...
एक मतला दो शेर. ========== बहुत...जो मुस्कुराते हैं, असल में गम छुपाते हैं, जुबां...खामोश रखते हैं, सभी रिश्ते....निभाते हैं, हज़ारों......दर्द सहते हैं, अकेले.......टूट जाते हैं, bahut jo........muskuraate hain, asal main gum chhupaate hain, zubaan khaamosh rakhte hain, sabhi rishte.......nibhaate hain, ...
इबादत से अगरचे हम.....बहुत मंसूब होजाएं, तो लाज़िम है ज़माने की नज़र में खूब हो जाएं, किसी दिल में क़दम रखना भी कार-ए-पुख्ता कारा है, ज़रा नज़र-ए-इनायत हो......कि बस महबूब हो जाएं, हज़ारों जान स...
तीन शेर अजीब हाल में रहने लगे थके से क़दम, मलाल दिल को रहा आबले छुपाते हुए.. कभी हुआ ही नहीं हमसे जिन ग़मों का हिसाब, ज़माना रोने लगा वो सफ़हे गिनाते हुए, जो चाहता था मिरी रूह से बातें...
एक बार फिर... --------------- तुमको पसंद हमने किया तुमने क्या किया?? दिल को बुलंद हमने किया तुमने क्या किया?? तनहाइयों में रोया किये.......ज़ार-ज़ार खूब, दिल दर्द मंद हमने किया तुमने क्या किया?? तुमन...
लोग जो ग़ुरबत का रोना रो रहे हैं, ख़ुद-ब-ख़ुद ही बीज इसके बो रहे हैं, दाने-दाने को भले मोहताज हरगिज़, ज़िन्दगी को बोझ करके ढो रहे हैं, घर नहीं है,दर नहीं बिस्तर नहीं है दम-ब-दम अतफ़ाल फिर ...
जब अँधेरे थे ,वो पराया था। रौशनी देख के जो आया था। उसको दरकार सिर्फ़ खुशियाँ थीं, मैंने तकलीफ़ में बुलाया था। मेरी उम्मीद खुद पे कायम थी, इससे बेहतर तो मेरा साया था। अपने हाथों ...
क्या ख़बर तुझको,क्या हकीक़त है, ज़िन्दगी ......मौत की ही आहट है, यूँ मयस्सर हज़ार खुशियाँ हैं , पर कहीं इसमें कुछ मिलावट है, मिलने वाले हज़ार मिलते हैं, वो नहीं,जिसकी हमको चाहत है, राम कहल...
जब बहुत सोचा, निभाने के लिए, दिल ने चाहा, पास जाने के लिए, फ़ासले थे दरमियां, कुछ इस क़दर, जो मिटाने पर भी, मिट पाये नहीं, जागती रातें कसक में, हो गईं तब्दील,जब, हर कराहट,चीखती सी रह गई, ...
Aug 05, 2015 7:58am क़ब्र पर मिट्टी चढ़ाई जा रही है, लाश कुछ गहरी दबाई जा रही है, लग रही है रेत मुट्ठी से फिसलती , हाथ से निकली ख़ुदाई जा रही है, उफ़ पसीना आगया कैसा जबीं पर, ज़िन्दगी भर की कमाई ज...
हवाओं में साज़िश घुली आ रही है, सखावत की रंगत धुली जा रही है, मुहब्बत को मीज़ान पर क्या रखोगे, ज़का से लक़ा तक तुली आ रही है, अमानत में तुमने जो की है ख़यानत वो पोशीदगी भी खुली जा रही ह...
पंछियों के रूप से,ऑ हर सुबह की धूप से, कोयल की मीठी कूक से,दिल में उठती हूक से, हैरान हूँ !! हैरान हूँ !! दिल में छुपी कटार से दुनियाँ की मीठी मार से, पत्थर पै चढ़ते हार से,हो क़रम की गु...
उसको सबसे जुदा समझते थे, सच है कि नाख़ुदा समझते थे, उसको दर्ज़ा दिया मशाइख का, खुद को अदना ग़दा समझते थे, जिसमें था इन्तेहा का रंग रचा, उसको हम इब्तेदा समझते थे, दिल को ये रायगाँ यक़ी...
Likkha jo hasraton se unhen khat kabhi janaab, Khiise main berukhi se rakhaa mod maad kar Hamko hamaari rooh ne aagaah kar diyaa Bas ham bhi chal diye lo unhen chhod chhad kar.. लिख्खा जो हसरतों से कभी ख़त उन्हें जनाब, खीसे में बेरुख़ी से रखा,मोड़ माड़ कर, हमको हमारी रूह ने आगाह कर दिया, बस हम भी चल दिए लो उन्हें छोड़ छाड़ कर उर्...
वो आदमी वही है,लहजा बदल गया है, अब दरमियां हमारे,किस्सा बदल गया है, हम मुन्तज़िर रहे हैं,आने की कह गया था, गिनते हैं उँगलियों पर,हफ्ता बदल गया है, लगता है कुछ कमी है,पहचान में हमार...
जो चमन की मुझको हवा लगी, ये मैं क्या बताऊँ कि क्या लगी?? कोई शाख ज़ोर से जो हिल गयी , वो तो गुल गिरा के सम्हल गयी, कोई गुल मगर था कुचल गया, मेरे दिल से आह निकल गयी, -------------------------------- jo chaman ki mujhko hawaa lagii ye main kya bataaun ki kyaa lagii, koii shaakh zor se jo hil ...
आपकी अपनी कलम थी या वो कोई और था? गालियां झड़ती थीं जिससे,वो भी कोई दौर था ? जब मुहब्बत की उम्मीदें, ..ख़ाक में पिनहां हुईं किस क़दर पहुंची थीं चोटें, इसपे कोई गौर था? आज घर खलिहान के क...
मुझको ग़म में ख़्वाब सजाना आता है, उल्फ़त का दस्तूर निभाना आता है, कोई साज़िश रचके रुसवा ख़ूब करे, आगे बढ़कर प्यार दिखाना आता है, फ़र्क़ समझना आजाता है पल भर में, हंस हंस के हर बात भुलान...