फ्री वर्स

यादें,
कभी सुनहरी नहीं हो सकतीं,
हम याद करते हैं उनको,जो,
ज़िन्दगी की राहों में बिछुड़ गए,
लौटेंगे नहीं दोबारा,हरगिज़,
वो पल सुनहरे कैसे हो सकते हैं !!
याद आते हैं वो,
जो बहुत दूर हैं,
हमारी,पहुँच से.
सिंदूरी होती हुई शामें,
सूरज को याद करती हैं,
डूब जाते हैं,उसकी लाली में हम,
जो अँधेरा देकर जाती है,
कल फिर आने का एहसास,
और अगर ना आये तो ?
हमेशा को खो जाए तो ?
क्या यादें सुनहरी हो जायेंगी?
कभी नहीं,
हम इंतज़ार करते हैं,हर पल,
कुछ ऐसी खुशियों का,
नहीं मिलतीं जो कभी,
कभी हम तस्वीरों से जी बहलाते हैं,
कभी यादों के ग़म से,
कभी चश्म-ए-पुरनम से,
वो यादे,जो रुला जाती हैं,
अक्सर,
मिलती नहीं वो दुनियां भी,
जो मौजूद है,
इरादे,दरकते रहते हैं,
खामोशियाँ,रोती रहती हैं,
और हम उन यादों को,
भुलाने की कोशिशों में,
उम्र ज़ाया करते हैं,
जो कभी भुलाई ही नहीं जातीं....
उर्मिला माधव..
२०.12.2015...

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