ग़ज़ल
ज़िन्दगी धुंआ-धुंआ,
आदमी धुंआ-धुंआ,
ज़िन्दगी की राह में,
हर ख़ुशी धुंआ-धुंआ.....
जो नज़ारे जल्वागर हैं,
उनमें कुछ मज़ा नहीं,
बेसबब समझ रहा है,
ज़िन्दगी सज़ा नहीं,
बेकसी की राह में,
सादगी धुंआ-धुंआ..
उर्मिला माधव..
23.12.2016
ज़िन्दगी धुंआ-धुंआ,
आदमी धुंआ-धुंआ,
ज़िन्दगी की राह में,
हर ख़ुशी धुंआ-धुंआ.....
जो नज़ारे जल्वागर हैं,
उनमें कुछ मज़ा नहीं,
बेसबब समझ रहा है,
ज़िन्दगी सज़ा नहीं,
बेकसी की राह में,
सादगी धुंआ-धुंआ..
उर्मिला माधव..
23.12.2016
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