एक मतला दो शेर

आपकी अपनी कलम थी या वो कोई और था?
गालियां झड़ती थीं जिससे,वो भी कोई दौर था ?

जब मुहब्बत की उम्मीदें, ..ख़ाक में पिनहां हुईं
किस क़दर पहुंची थीं चोटें, इसपे कोई गौर था?

आज घर खलिहान के किस्से सुनाते हो किसे ?
उन दिनों क्या बात कहने का भी कोई तौर था ?
उर्मिला माधव
3.12.2016

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