ग़ज़ल
हर दिल में ख्वाहिश है बाक़ी,रोटी,कपडा और मकान,
चलो लगाएं नारा मिलकर,वाह-वाह अपना हिंदुस्तान,
दाल-वाल क्या करेंगे खाकर,पांच सितारा होटल है क्या,
सूखी रोटी खाकर बोलो,वाह-वाह अपना हिन्दुस्तान ,
कितनी बढ़िया,गाय,भैंस हैं,कट जाती हैं,बिन कुछ बोले,
चुप रहकर कट जाओ,बोलो,वाह-वाह अपना हिन्दुस्तान
सत्ताधीशों की मजबूरी,समझ नहीं क्यों आती सबको,
ग़ुरबत में रहकर भी कहते,वाह-वाह अपना हिन्दुस्तान,
वतन की ख़ातिर, मिटने वाले सीख गए हैं,मरके जीना,
मरते-मरते बोल गए सब,वाह-वाह अपना हिन्दुस्तान...
#उर्मिलामाधव
13.12.2015
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